वाराणसी।संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने प्रधानमंत्री जी द्वारा ज्ञान भारतम् पोर्टल के शुभारंभ के लिए आभार व्यक्त करते हुए इसकी उपयोगिता और महत्व पर प्रकाश डालते हुए जनसंपर्क अधिकारी के माध्यम से वाराणसी की सम्मानित मीडिया को एक संदेश प्रसारित किए हैं।

भारतवर्ष प्राचीन काल से ही ज्ञान, विज्ञान, साहित्य और संस्कृति का अमर भण्डार रहा है। हमारी गौरवशाली पाण्डुलिपि परम्परा न केवल भारतीय चिन्तन का आधार रही है, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए मार्गदर्शक स्वरूप भी सिद्ध हुई है। दुर्भाग्यवश इतिहास की अनेक विपरीत परिस्थितियों में करोड़ों पाण्डुलिपियाँ नष्ट हो गईं, तथापि आज भी शेष रह गई पाण्डुलिपियाँ हमारे पूर्वजों के ज्ञान, विज्ञान और शोध- मनस्विता का साक्षात् प्रमाण प्रस्तुत करती हैं।

ऐसे समय में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा “ज्ञान भारतम् मिशन” तथा ज्ञान भारतम् पोर्टल का शुभारम्भ किया जाना निश्चय ही भारतीय ज्ञान-परम्परा को पुनः विश्वपटल पर प्रतिष्ठित करने की ऐतिहासिक पहल है। इस मिशन के माध्यम से पाण्डुलिपियों के डिजिटलीकरण, संरक्षण तथा वैश्विक स्तर पर उनके सुगम प्रसार की जो विशाल योजना प्रारम्भ हुई है, वह भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास को नये युग में प्रविष्ट कराएगी।

माननीय प्रधानमंत्री जी ने अपने सम्बोधन में जिस प्रकार युवाओं का आह्वान करते हुए इस कार्य को नवोन्मेष और अनुसंधान से जोड़ने की प्रेरणा दी है, वह अत्यन्त प्रशंसनीय है। इससे भारतीय युवाशक्ति न केवल अपने अतीत के गौरव से परिचित होगी, अपितु नवीनतम प्रौद्योगिकी के माध्यम से उसे भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भी करेगी। यह पहल विश्व के 2.5 ट्रिलियन डॉलर मूल्य के सांस्कृतिक एवं सृजनात्मक उद्योगों को भी समृद्ध करेगी और भारत की भूमिका को इस क्षेत्र में अग्रणी बनाएगी।

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी की ओर से हम माननीय प्रधानमंत्री जी का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने पाण्डुलिपि संरक्षण के इस महत्त्वपूर्ण कार्य को राष्ट्रीय मिशन का स्वरूप प्रदान किया। हमारा विश्वविद्यालय, जहाँ एक लाख ग्यारह हज़ार से अधिक पाण्डुलिपियाँ सुरक्षित हैं, इस मिशन के माध्यम से अपनी प्राचीन धरोहर को डिजिटलीकृत कर वैश्विक समाज के साथ साझा करने हेतु संकल्पित है। यह कार्य न केवल विश्वविद्यालय के लिए, बल्कि सम्पूर्ण भारत की सांस्कृतिक धरोहर को अमर बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा।

हम विश्वास करते हैं कि ज्ञान भारतम् मिशन के माध्यम से भारतीय ज्ञान-संस्कृति की ज्योति और भी प्रखर होगी तथा यह पहल विश्व को पुनः भारत की उस गूंजती हुई वाणी से परिचित कराएगी, जो ज्ञान, विज्ञान और आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत है।

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