
वाराणसी। विश्व हिंदी दिवस पर प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र लमही द्वारा आयोजित सुनो मैं प्रेमचंद श्रृंखला में इस बार प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी “विद्रोही” का पाठ डॉ. सोनी स्वरूप ने किया। शुभारंभ प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ। संरक्षक प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि समाज का आईना है। उन्होंने कहा कि “विद्रोही” ऐसी कथा है जो प्रेम, पीड़ा और सामाजिक विडंबनाओं के बीच व्यक्ति की असहायता और विद्रोह को मार्मिक रूप से उजागर करती है। प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि यह केवल प्रेमकथा नहीं है बल्कि सामाजिक स्वार्थ और पारिवारिक लोभ के कारण टूटते सपनों की गाथा है। इस अवसर पर निदेशक राजीव गोंड, विपनेश सिंह, राहुल यादव, अन्वित दूबे, चंदन, विवेक, आदीत राय, अजय यादव, रामजी सिंह, मेवालाल श्रीमाली, राहुल विश्वकर्मा, देव बाबू, प्रांजल कुमार आदि थे। स्वागत डॉ. संजय श्रीवास्तव, संचालन आयुषी दूबे,धन्यवाद ज्ञापन मनोज विश्वकर्मा ने किया।
