
हिंदी दिवस समारोह

वाराणसी।अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र, वाराणसी में हिन्दी दिवस के अवसर पर ‘हिन्दी दिवस कार्यक्रम एवं हिन्दी सप्ताह समारोह’ का भव्य आयोजन हुआ। जिसमें दिनांक 9 सितम्बर से 14 सितम्बर तक विभिन्न कार्यक्रमों यथा हिन्दी कविता पाठ, हिन्दी भाषण प्रतियोगिता, हिन्दी निबन्ध लेखन प्रतियोगिता, हिन्दी में कार्यालयीय कार्य विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मंगलाचरण व मां सरस्वती, महामना पं. मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर पुष्पार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उदय प्रताप स्वायत्त महाविद्यालय, वाराणसी के हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष, प्रो. राम सुधार सिंह, सारस्वत अतिथि आयुर्वेद परिषद्, राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग, भारत सरकार के सदस्य प्रो. कमलेश कुमार द्विवेदी एवं विशिष्ट अतिथि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के हिन्दी विभाग की प्रो. आभा गुप्ता ठाकुर रहे। समारोह की अध्यक्षता आईयूसीटीई के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने की।
अपने उद्बोधन में प्रो. राम सुधार सिंह, पूर्व अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, उदय प्रताप स्वायत्त महाविद्यालय, वाराणसी ने कहा कि राजभाषा सत्ता की भाषा होती है, अलग-अलग काल तथा देश में भले ही राजभाषा के रूप में संस्कृत, फ़ारसी और अंग्रेजी भाषाएँ उपयोग की जाती थीं तब भी जनता की भाषा के रूप में हिन्दी ही रही है। हिन्दी कभी सत्ता की भाषा नहीं रही है यह तो किसानों, फकीरों अर्थात् आम-जनमानस के साथ-साथ यह देश को एकता के सूत्र में बांधने वाली भाषा के रूप में भी रही है। उन्होंने कहा कि सुदूर अर्थात् पूरब से लेकर पश्चिम तक और उत्तर से लेकर दक्षिण को एक सूत्र में बांधने का काम हिन्दी करती है । देश की सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता को जानने हेतु हिन्दी को जानना अति आवश्यक है।
प्रो. कमलेश कुमार द्विवेदी, सदस्य, आयुर्वेद परिषद्, राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग, भारत सरकार ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमें अपनी संस्कृति की पहचान अपनी मातृभाषा से मिलती है, यह हमें संस्कार देती है। इस रूप में देश में हिन्दी अपना प्रमुख स्थान रखती है। उन्होंने कहा कि आज अंग्रेजी ने हिन्दी का बहुत नुकसान किया है किन्तु हमें अंग्रेजियत को त्यागकर हिन्दी को अपनाने की जरूरत है। हिन्दी का संस्कार देने में हमारे माता-पिता, गुरुजनों और बड़ों का बहुत योगदान है।
प्रो. आभा गुप्ता ठाकुर, हिन्दी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी ने कहा कि हिन्दी भाषियों को उदारता को अपनाना चाहिए और अतिरिक्त शुद्धतावाद को त्यागकर लचीला बनना होगा तभी हमारी हिन्दी अति संपन्न होगी क्योंकि हिन्दी भाषा में वह ताकत है जो स्वयं का अनुकूलन करती है, और दूसरी भाषाओं के शब्दों को अपने में ढाल लेती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिन्दी को रोजगार की भाषा के रूप में स्थापित करना होगा जिससे यह राष्ट्रभाषा के रूप में अपना स्थान बना पाने में सक्षम बनेगी।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, वाराणसी ने कहा कि हिन्दी हमारे आत्म-सम्मान की भाषा है जो हमें राष्ट्र एकता और राष्ट्र गौरव का पाठ पढ़ाती है। हिंदी भाषियों को अपने अन्दर की हीन भावना से ऊपर उठकर अपनी भाषा- संस्कृति पर गौरव-बोध की आवश्यकता है और यह सम्भव होगा आत्मविश्वास से। उन्होंने कहा कि हिन्दी देश की सांस्कृतिक विविधता को एक सूत्र में पिरोने का काम करती है। इस अवसर पर उन्होंने स्वलिखित लघु कविता ‘हमारी राष्ट्र भाषा हिन्दी है’ का भी वाचन किया।
प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय अध्यक्ष, शैक्षणिक व शोध, IUCTE, ने मंचासीन अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मातृभाषा और प्रादेशिक भाषा पर अधिक जोर देती है जिसके अनुपालन से निश्चित ही देश का गौरव बढेगा। उन्होंने कहा यदि हिन्दी को अपनी कार्यप्रणाली का हिस्सा बना लिया जाए तो निश्चित ही देश में हिन्दी संस्कृति का संरक्षण सम्भव बनेगा।
इस समारोह में सप्ताह भर तक आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने वाले और विजयी प्रतिभागियों को केंद्र की तरफ से अंगवस्त्रम, स्मृति चिन्ह व प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। साथ ही केंद्र का परिचयात्मक वृत्ति चित्र प्रस्तुत किया गया। इस समारोह में मंगलाचरण डॉ. राजा पाठक, धन्यवाद ज्ञापन केंद्र के राजभाषा अधिकारी प्रो. अजय कुमार सिंह, संचालन डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी ने किया। इस कार्यक्रम में केंद्र के अध्यापक, अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
