वसन्त कन्या महाविद्यालय में हिंदी दिवस समारोह 

 

वाराणसी।वसंत कन्या महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा ‘हिंदी नई चाल में ढ़ली’ विषय पर ‘हिंदी दिवस समारोह’ सोमवार को आयोजन किया गया। इस आयोजन की मुख्य वक्ता डा प्रियंका सोनकर हिंदी विभाग काशी हिंदू विश्वविद्यालय रहीं।

कार्यक्रम का प्रारंभ संगीत विभाग की अध्यक्षा प्रो. सीमा वर्मा एवं डा पूनम वर्मा के निर्देशन में संगीत विभाग की छात्राओं द्वारा सुमधुर कुलगीत प्रस्तुति से हुआ। जिसमें तबले पर संगत श्री सौम्यकान्ति मुखर्जी ने की।

मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए साहित्य प्रेमी प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने कहा कि आज हमने अपने भाषा में बहुत परिवर्तन कर लिया है। क्षेत्रीय भाषाई प्रभाव से कोई नहीं बच सका। हम विभिन्न भाषाओं को ग्रहण करते हुए अपने भाषा में कई भाषा एवं बोलियों का प्रयोग करते हुए उनमें परिवर्तन लाते हैं। हमारी सम्प्रेषणीयता वर्तमान समय में बहुत कम हो गई है। जिसकी वजह से आज हम शब्दों के चयन और प्रयोग से दूर होते जा रहे हैं। सम्वाद की कमी ने विश्व को विनाश के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। हिन्दी के की-पैड के प्रयोग पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया।

हिंदी दिवस की सभी को बधाई देते हुए हिंदी विभाग की कर्मठ अध्यक्षा प्रो. आशा यादव ने आभासी मंच के माध्यम से विषय प्रस्तवन में हिन्दी भाषा के विकास पर अपनी सुक्ष्म दृष्टि रखते हुए कहा कि भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने पहली बार अपनी पुस्तक ‘कालक्रम’ में ‘हिन्दी नई चाल में ढली’ वाक्य का प्रयोग किया। यह वाक्य उस समय हिन्दी भाषा में आये बदलाव को दर्शाता है। जिसमें भाषा ने प्राचीनता को छोड़कर आधुनिक रूप धारण कर लिया। भारतेन्दु ने उर्दू के बहाने पश्चिमी घुसपैठ को रोकने तथा अंग्रेजी भाषा के प्रयोग पर विराम लगाने हेतु हिन्दी भाषा को परिष्कृत रूप को स्थापित करने का पुरजोर प्रयास किया। हिन्दी भाषा के विकास में उनका यह योगदान अमूल्य है।

तत्पश्चात मुख्य अतिथि डॉ. प्रियंका सोनकर ने हिंदी भाषा के ज्ञान को महत्व देते हुए कहा कि 1873 से पहले हिन्दी एक स्वरूप में आ चुकी थी। उस समय हिन्दी उर्दू का विवाद चल रहा था। अंग्रेजों ने फूट डालो राज करो नीति को अपनाते हुए शासकीय कार्यो के लिए अंग्रेजी और उर्दू भाषा के प्रयोग पर अधिक बल दिया। उन्होंने शिवप्रसाद सितारे हिंद, रामविलास शर्मा, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, अज्ञेय, ग़ालिब, दुष्यन्त आदि साहित्यकारों के कथनों का उदाहरण देते हुए तत्कालिन समय की भाषाई स्थिति को प्रस्तुत करने का प्रयास किया।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हिन्दी भाषा ने जो रूप धारण कर लिया है। उसके लिए यह जरूरी है कि हम उसके साथ अपना ताल-मेल बैठायें, क्योंकि सरल भाषा का प्रयोग ही राष्ट्र में एकता ला सकता है।

स्नातक तृतीय वर्ष की छात्रा मौसम कुमारी ने हिंदी भाषा पर सारगर्भित भाषण प्रस्तुत किया।

संपूर्ण कार्यक्रम के संयोजन का कार्य डॉ. प्रीति विश्वकर्मा एवं सुश्री राजलक्ष्मी ने किया। कार्यक्रम का संचालन परास्नातक द्वितीय वर्ष की छात्रा अनन्या सृष्टि ने तथा धन्यवाद ज्ञापन परास्नातक द्वितीय वर्ष की छात्रा सौम्या सिंह ने किया। इस उपलक्ष्य में हिंदी विभाग से डॉ. सपना भूषण, डॉ शशि कला एवं अन्य विभाग से डॉ. कमला पाण्डेय सहित महाविद्यालय के सभी शिक्षकवृंदो की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया।

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