प्रमुख संवाददाता/नजर न्यूज नेटवर्क 

 

वाराणसी। पीएम श्री राजकीय क्वींस इंटर कालेज एवं प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र द्वारा पीएम श्री राजकीय क्वींस इंटर कालेज वाराणसी में हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित “सुनो मैं प्रेमचंद” कार्यक्रम का आयोजन प्रधानाचार्य श्री सुमीत कुमार श्रीवास्तव के निर्देशन में सफलतापूर्वक हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से हुआ। विशिष्ट अतिथि प्रेमचंद की भतीजी नंदनी राय एवं मुख्य अतिथि संगीता श्रीवास्तव का सम्मान श्री सुमीत श्रीवास्तव एवं राजीव गोंड ने किया।

प्रेमचंद की कहानी “पागल हाथी” का पाठ छात्र सुंदरम् यादव ने भाव एवं अनुभूति के साथ किया। सुमीत कुमार श्रीवास्तव द्वारा छात्र सुंदरम यादव को उत्तरी एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर प्रधानाचार्य सुमीत कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि “पागल हाथी” केवल एक हाथी की कहानी नहीं है, बल्कि यह मानवीय संबंधों, सामाजिक संरचना और सत्ता-मानसिकता का गहन रूपक है। प्रेमचंद ने इस कहानी के माध्यम से दिखाया कि क्रोध और विद्रोह का उपचार केवल दंड नहीं, बल्कि करुणा और प्रेम है। यही कारण है कि यह कथा आज भी पाठकों के हृदय को झकझोर देती है और उन्हें सोचने पर मजबूर करती है।

मुख्य अतिथि डॉ संगीता श्रीवास्तव ने कहा कि हिंदी कथा-साहित्य में मुंशी प्रेमचंद का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वे केवल कथाकार ही नहीं, बल्कि यथार्थवादी दृष्टा और समाज के सचेत प्रवक्ता भी थे। उनकी कहानियाँ जीवन के विविध पक्षों को उजागर करती हैं—कहीं दहेज की त्रासदी, कहीं वर्ग-संघर्ष, कहीं स्त्री की पीड़ा तो कहीं मानवीय संबंधों की जटिलता। “पागल हाथी” ऐसी ही एक महत्वपूर्ण कहानी है, जिसमें पशु के माध्यम से मानवीय भावनाओं और सामाजिक विडंबनाओं को उकेरा गया है। प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र के निदेशक राजीव गोंड ने कहा कि प्रेमचंद की भाषा सजीव और चित्रात्मक है। हाथी की पीड़ा, उसकी चिंघाड़ और मुरली से पुनर्मिलन सब कुछ पाठक की आँखों के सामने घटता हुआ प्रतीत होता है। संवाद कम हैं, पर कथा की प्रवाहमयी शैली और वर्णनात्मक ताक़त पाठक को बाँधे रखती है।

कार्यक्रम का संयोजन डॉ शुभा श्रीवास्तव, संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन हिमांशु तिवारी ने किया। इस अवसर पर विजय भारतीय सिंह, इशिका पाल, सुमन सिंह, फातिमा फिरोज, जया सिंह, नेहा सिह, नीलिमा श्रीवास्तव, राधेश्याम कुशवाहा, वेद प्रकाश राय, कन्हैया लाल, सुनील सिंह आदि थे।

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