वाराणसी।काशी के लाल, मीनाकारी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अनेक सम्मान से सम्मानित बलराम सेठ ने अपनी कलाकृति के लिए भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर का चयन किया है, जो अद्वितीय सौंदर्य और दिव्यता का प्रतीक है। मोर की छटा वास्तव में अनुपम है—इसके पंख और भव्य पुच्छिका इंद्रधनुषी रंगों की आभा से सुसज्जित प्रतीत होते हैं।

उन्होंने बताया कि अद्वितीय कृति को साकार करने में मुझे चार माह का समय लगा, जिसमें लगभग तीन सौ ग्राम शुद्ध रजत तथा पाँच ग्राम स्वर्ण का विन्यास किया गया है। साथ ही, इस कला की शोभा बढ़ाने हेतु माणिक और पन्ना जैसे कीमती रत्नों को स्वर्ण कुंदन से जड़ित किया गया है।

आधार भाग को उत्तम लकड़ी एवं रजत से निर्मित कर उस पर स्वर्ण की प्लेटिंग की गई है, जिससे संपूर्ण कृति और अधिक गरिमामयी प्रतीत होती है। मोर के पंखों और पुच्छ में प्रयुक्त प्राकृतिक रंग न केवल इसकी आकर्षण-छटा को जीवंत करते हैं, बल्कि इसे एक सजीव और नैसर्गिक सौंदर्य प्रदान करते हैं। यह कलाकृति न केवल शिल्पकला का अद्वितीय उदाहरण है, बल्कि भारतीय संस्कृति की रंगीन परंपरा और शाश्वत कलात्मकता का दर्पण भी है।

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