
शिवपुर की रामलीला

वाराणसी। अतिप्राचीन एवं प्रसिद्ध शिवपुर की रामलीला में बुधवार को भगवान श्रीराम, माता सीता एवं लक्ष्मणजी के वनवास प्रसंग के अंतर्गत वाल्मीकि मिलन एवं चित्रकूट विश्राम की लीला का भव्य मंचन किया गया। जिसमें प्रभु श्रीराम भारद्वाज आश्रम से प्रस्थान किये। मार्ग में उनकी भेंट एक बाल रूप तापस से हुई, जिसने प्रभु के चरणों में गिरकर वंदन किया। श्रीराम उन्हें आशीर्वाद देकर आगे प्रस्थान किये। जब श्रीराम अपने परिवार सहित मार्ग में पड़ने वाले ग्रामों से गुजरे, तो ग्रामवासी उनके वनवासी रूप को देखकर अत्यंत आश्चर्यचकित हुए। स्त्रियों ने माता सीता से प्रश्न किया, जिस पर उन्होंने बताया कि उन्हें पिता के वचनों का पालन करते हुए 14 वर्षों तक वनवास करना है। ग्रामवासियों ने उन्हें अपने बीच रुकने का आग्रह किया, किंतु श्रीराम ने धर्मपालन की बात कहकर आगे बढ़ना उचित समझा। चित्रकूट पहुंचकर प्रभु श्रीराम की भेंट महर्षि वाल्मीकि से हुई। साक्षात् परमब्रह्म को अपने कुटिया में पाकर महर्षि अत्यंत प्रसन्न हुए और कहा कि जिन प्रभु के दर्शन के लिए ऋषि-मुनि युगों तक तपस्या करते हैं, वे आज माता सीता और लक्ष्मणजी के साथ उनके आश्रम में पधारे हैं। महर्षि वाल्मीकि सहित समस्त ऋषि-मुनियों ने प्रभु का सत्कार किया तथा कंद-मूल-फल अर्पित किए।
इसके उपरांत जब श्रीराम ने निवास हेतु स्थान पूछा तो महर्षि वाल्मीकि ने चित्रकूट की पावन वादियों को उपयुक्त बताया। तत्पश्चात प्रभु श्रीराम ने माता सीता एवं लक्ष्मणजी के साथ चित्रकूट में पर्णकुटी बनाकर निवास किया।
इस अद्भुत मंचन को देखकर दर्शक भावविभोर हो उठे और जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा रामलीला मैदान गूंज उठा।
