
वाराणसी।बसंत कन्या महाविद्यालय के हिंदी विभाग एवं पुनर्नवा हिन्दी साहित्य परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी सप्ताह के अंतर्गत तीसरे दिन काव्य-पाठ प्रतियोगिता का आयोजन बड़े ही उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर छात्राओं की ओजस्वी वाणी और काव्य की मधुर लय ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया तथा वातावरण साहित्यिक रंगों से सराबोर हो उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ हिंदी विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो.आशा यादव ने निर्णायक मंडल का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए प्रतिभागियों को उत्साहवर्धक शुभकामनाएँ दीं। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में छात्राओं को निरंतर रचनाशील बने रहने और हिंदी साहित्य को अपनी अभिव्यक्ति का आधार बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। इस प्रतियोगिता में स्नातक और परास्नातक स्तर की लगभग 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
सभी छात्राओं ने चार मिनट की समय-सीमा के भीतर अपनी रचनाएँ अथवा प्रसिद्ध कवियों की रचनाओं का पाठ कर वातावरण को भाव, विचार और ऊर्जा से भर दिया। प्रस्तुत कविताओं के विषय न केवल विविध रहे, बल्कि अत्यंत सामयिक भी थे, कन्या भ्रूण हत्या, पर्यावरण प्रदूषण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की माया पर छात्राओं की कविताओं ने श्रोताओं को गहन विचार के लिए प्रेरित किया। छात्राओं ने महाकवि दिनकर, महादेवी वर्मा, मैथिलीशरण गुप्त, जयशंकर प्रसाद और समकालीन कवि सतीश सृजन की पंक्तियों का ओजस्वी पाठ कर काव्य की शक्ति और सौंदर्य का अद्भुत परिचय दिया। काव्य की स्वर लहरियों ने सभागार को मानो एक साहित्यिक मंदिर में परिवर्तित कर दिया। निर्णायक मंडल में डॉ. सपना भूषण (हिंदी विभाग), डॉ. पूर्णिमा सिंह (अंग्रेजी विभाग), डॉ. आरती कुमारी (प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग) तथा हिंदी विभाग की डॉ. शशिकला उपस्थित रहीं। निर्णायकों ने छात्राओं के प्रस्तुतिकरण की सराहना करते हुए कहा कि हिंदी भाषा हमारी संस्कृति की आत्मा है और इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ युवा पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम हैं। प्रतियोगिता का संचालन सरस शैली में कोमल ने किया और औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन हर्षा सुमन द्वारा दिया गया। संपूर्ण आयोजन का संयोजन डॉ. प्रीति विश्वकर्मा और सुश्री राजलक्ष्मी जायसवाल के मार्गदर्शन में पुनर्नवा हिन्दी साहित्य परिषद द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस प्रकार काव्य-पाठ प्रतियोगिता ने न केवल छात्राओं की साहित्यिक प्रतिभा को मंच प्रदान किया, बल्कि हिंदी सप्ताह के उत्सव में एक नई ऊँचाई भी जोड़ दी। कविताओं की गूँज ने यह संदेश दिया कि हिंदी काव्य आज भी हृदय को छूने, विचार जगाने और समाज को नई दिशा देने की अपार क्षमता रखता है।
