
वाराणसी।वसंत कन्या महाविद्यालय के हिंदी विभाग एवं पुनर्नवा हिन्दी साहित्य परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में चल रहे हिंदी सप्ताह की चौथी कड़ी के अंतर्गत कहानी पाठ प्रतियोगिता का आयोजन गरिमामयी एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
प्रतिदिन की भांति इस दिन भी साहित्य और संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला। कहानी पाठ प्रतियोगिता में छात्राओं ने अपनी सजीव और ओजस्वी वाणी से हिंदी कथा-साहित्य के अनूठे सौंदर्य को इस प्रकार प्रस्तुत किया कि पूरा वातावरण साहित्यिक रसधारा से सराबोर हो उठा। उनकी संवेदनशील अभिव्यक्ति और भावपूर्ण वाचन ने श्रोताओं और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ हिंदी विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. आशा यादव ने निर्णायक मंडल का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए किया।
उन्होंने प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ दीं और उनके उत्साह को प्रोत्साहित किया। इसी क्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने भी प्रतिभागियों की अभिव्यक्ति-कौशल की सराहना करते हुए कहा कि कहानी-पाठ जैसी प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों को साहित्य की भावभूमि से जोड़ने का अमूल्य अवसर प्रदान करती हैं। प्रतियोगिता में स्नातक एवं परास्नातक स्तर की लगभग 25 प्रतिभागियों ने भाग लिया। निर्धारित चार मिनट की अवधि में सभी ने अपनी कहानियों का वाचन दक्षता और संवेदनशीलता के साथ किया। प्रस्तुत कहानियों में पंच-परमेश्वर, बूढ़ी काकी, मंत्र, रोज़, पर्दा, और अपना- अपना भाग्य जैसी कालजयी रचनाएँ प्रमुख रहीं। छात्राओं की सजीव प्रस्तुति ने इन कहानियों को नए जीवन से भर दिया और उपस्थित जनसमूह को कथा-साहित्य की गहराई में ले गई।
निर्णायक मंडल में डॉ. शशिकला (हिंदी विभाग), डॉ. दीक्षा जायसवाल (चित्रकला विभाग), डॉ. आरती चौधरी (प्रा. भा. इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग) तथा डॉ. सपना भूषण (हिंदी विभाग) की गरिमामयी उपस्थिति रही। निर्णायकों ने प्रतिभागियों के प्रस्तुतीकरण की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि – “हिंदी भाषा हमारी संस्कृति की आत्मा है और कहानी पाठ जैसे आयोजन युवा पीढ़ी को साहित्य की संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं।” कार्यक्रम का संचालन सुश्री रीति कुमारी ने सहजता और सौंदर्यपूर्ण शब्दों में किया तथा धन्यवाद ज्ञापन अनुपमा द्वारा दिया गया। संपूर्ण प्रतियोगिता का सफल संयोजन डॉ. प्रीति विश्वकर्मा एवं सुश्री राजलक्ष्मी जायसवाल के कुशल निर्देशन में पुनर्नवा हिंदी साहित्य परिषद द्वारा किया गया। निस्संदेह, हिंदी सप्ताह का यह चौथा दिन न केवल छात्राओं की प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने वाला साबित हुआ, बल्कि इसने हिंदी साहित्य के प्रति गहरी आत्मीयता और अभिव्यक्ति-शक्ति के महत्व को भी उजागर किया। कहानी पाठ प्रतियोगिता ने हिंदी सप्ताह की सांस्कृतिक यात्रा में एक अनुपम अध्याय जोड़ दिया।
