कार्यशाला में दूसरा दिन 

 

वाराणसी । शनिवार को अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र, बीएचयू, वाराणसी व विश्व आयुर्वेद परिषद, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में “साइंटिफिक राइटिंग, रिसर्च इंटीग्रिटी एंड पब्लिकेशन एथिक्स” विषय पर तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरुआत डॉ० मनदीप जायसवाल, सह-आचार्य, राज्य आयुर्वेदिक कॉलेज एवं चिकित्सालय, लखनऊ के “शोध लेख के आवश्यक घटक” विषयक व्याख्यान से हुई।

उन्होंने बताया कि शोध लेख की गुणवत्ता शोध समस्या की स्पष्टता, उद्देश्य, पद्धति, परिणाम और निष्कर्ष, पारदर्शिता और वैज्ञानिकता पर निर्भर करती है।

द्वितीय वक्ता डॉ० नारायण एस० जाधव, सदस्य, एथिक्स एवं रजिस्ट्रेशन बोर्ड, एन.सी.आई.एस.एम., आयुष मंत्रालय, नई दिल्ली ने “भारतीय चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों के अधिकार एवं विशेषाधिकार” विषय पर अपने व्याख्यान में कहा कि चिकित्सकों को वर्तमान समय के कानूनी अधिकारों, दायित्वों से परिचित होना चाहिए जो उन्हें अपने पेशे में निपुण बनाता है और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करता है।

तृतीय वक्ता डॉ० सुभाष साहू, सह-आचार्य एवं विभागाध्यक्ष, द्रव्यगुण, चन्द्रभानु ब्रह्मप्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान, दिल्ली ने “साहित्यिक शोध लेख का प्रारूपण” विषय पर चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों को लेख की संरचना, भाषा की शुद्धता, संदर्भों की विश्वसनीयता और अकादमिक मानकों के अनुरूप प्रस्तुति की महत्ता बताई।

चतुर्थ वक्ता डॉ० योगिता अभिजीत जमदाड़े, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, संहिता सिद्धांत एवं संस्कृत कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एवं रिसर्च सेंटर, निगड़ी, पुणे ने “समीक्षा लेखन” पर अपने वक्तव्य में कहा कि समीक्षा लेख किसी भी शोध क्षेत्र के प्रगति-पथ और चुनौतियों को समझने का माध्यम होता है। समीक्षा तैयार करते समय साहित्य का गहन अध्ययन, तुलनात्मक विश्लेषण और निष्कर्षों की सटीकता आवश्यक है। अन्य वक्ता डॉ० फहमीदा ज़ीनत, सहायक आचार्य, अजमल खान तिब्बिया कॉलेज, ए०एम०यू०, अलीगढ़ ने “केस रिपोर्ट/केस सीरीज़” विषय पर व्याख्यान में कहा कि केस रिपोर्ट और केस सीरीज़ नैदानिक अनुसंधान की आधारशिला होती हैं जो चिकित्सकों को दुर्लभ व जटिल मामलों से सीखने का अवसर प्रदान करती हैं।

अंतिम वक्ता डॉ० सुनील कुमार त्रिपाठी, आईयूसीटीई, बीएचयू, वाराणसी ने “संदर्भ प्रबंधन एवं ग्रंथ सूची” पर व्याख्यान और हैंड्स-ऑन कराया।

उन्होंने विभिन्न संदर्भ प्रबंधन उपकरणों, सही उद्धरण शैली और शोध लेखन में ग्रंथ सूची की सटीकता के महत्व को विस्तार से समझाया।

इस कार्यशाला के समन्वयक डॉ० विजय कुमार राय, अध्यक्ष, विश्व आयुर्वेद परिषद, उत्तर प्रदेश चैप्टर; संयोजक प्रो० अजय कुमार सिंह, आईयूसीटीई, आयोजन सचिवद्वय डॉ० मनीष मिश्रा एवं डॉ० आशुतोष कुमार पाठक, सह-संयोजक डॉ० सुनील कुमार त्रिपाठी, आईयूसीटीई और कोषाध्यक्ष डॉ० राम निहोर तापसी हैं। इस कार्यशाला में देशभर से बड़ी संख्या में प्राध्यापक और शोधार्थी शामिल रहे।

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