
वाराणसी । मंगलवार को अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र में 22 से 27 सितंबर 2025 तक छः दिवसीय ‘एकेडमिक लीडरशिप 5.0: नेविगेटिंग नेशनल एंड ग्लोबल ट्रेंड्स’ कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरुआत डॉ० राज सिंह, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई, वाराणसी के ‘एनएएसी एक्रिडिटेशन एंड आईक्यूएसी: एकेडमिक लीडरशिप फॉर क्वालिटी कल्चर’ विषय पर ओजपूर्ण व्याख्यान से हुई। उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु नैक की भूमिका, एक्रिडिटेशन की सात कसौटियों, प्रमुख संकेतकों तथा मैट्रिक्स की विस्तृत जानकारी प्रतिभागियों के साथ साझा की। साथ ही आईक्यूएसी की कार्यप्रणाली और इसके माध्यम से संस्थानों में गुणवत्ता संस्कृति को सुदृढ़ करने की रणनीतियों को स्पष्ट किया।
दूसरे सत्र में प्रो० रजनीश जैन, डीन, आईएमएस, डीएवीवी, इंदौर एवं पूर्व सचिव, यूजीसी, नई दिल्ली ने ‘एनआईआरएफ रैंकिंग्स: रोल ऑफ फैकल्टी लीडर्स इन इम्प्रूविंग इंस्टिट्यूशनल परफॉर्मेंस’ विषय पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। उन्होंने रैंकिंग के मानकों, डेटा प्रबंधन और संकाय की रणनीतिक भागीदारी पर प्रकाश डाला। सत्र में प्रतिभागियों ने संस्थागत गुणवत्ता बढ़ाने हेतु नेतृत्व की प्रभावी भूमिका को समझा और सराहा। तीसरे सत्र में डॉ० ज्ञानेंद्र सिंह ने ‘यूज़िंग एआई टूल्स इन टीचिंग, रिसर्च एंड अकैडमिक एडमिनिस्ट्रेशन’ विषय पर व्याख्यान देते हुए शिक्षण, अनुसंधान और प्रशासनिक कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी उपयोग की संभावनाओं को रेखांकित किया और साथ ही कुछ एआई टूल्स के हैंड्स-ऑन भी कराई। इन्होंने आज के अंतिम सत्र में ‘समूह चर्चा एवं प्रस्तुति’ के अंतर्गत प्रतिभागियों से भारतीय शिक्षा व्यवस्था में शोध, नवाचार और संस्थागत विकास व प्रभावी नेतृत्व के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया और प्रतिभागियों ने अपने विचार साझा किए।
इस छः दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम में देश के 20 से अधिक राज्यों यथा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, नई दिल्ली इत्यादि के 100 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। इस कार्यशाला का संयोजन डॉ० अनिल कुमार और सह-संयोजन डॉ० सुनील कुमार त्रिपाठी द्वारा किया जा रहा है।
