
वाराणसी। प्रसिद्ध शिवपुर की रामलीला में मंगलवार की रात श्रद्धा और आस्था से परिपूर्ण जयन्त नेत्रभंग तथा माता सीता और सती अनसूया की भेंट प्रसंग का भव्य मंचन हुआ। जयन्त प्रसंग में दिखाया गया कि वनवास काल के दौरान इन्द्रपुत्र जयन्त ने कौए का रूप धारण कर माता सीता के चरणों पर प्रहार किया। इसके परिणामस्वरूप भगवान श्रीराम ने एक तिनके को ब्रह्मास्त्र की शक्ति से संपन्न कर जयन्त का पीछा किया। सभी लोकों में भटकने के बाद अंततः जयन्त श्रीराम के चरणों में आ गिरा और क्षमा याचना की। करुणामूर्ति श्रीराम ने उसे क्षमा तो किया, किंतु दंडस्वरूप उसका एक नेत्र नष्ट कर दिया। इस प्रसंग से दर्शकों ने यह शिक्षा ग्रहण की कि भगवान की शरण लेने से अपराध क्षम्य हो सकता है, लेकिन दंड से बचना संभव नहीं। इसके बाद मंचन में सीता माता और महर्षि अत्रि की पत्नी सती अनसूया की भावपूर्ण भेंट दिखाई गई। सती अनसूया ने सीता को पतिव्रता धर्म की महिमा समझाई और उन्हें ऐसे दिव्य वस्त्र-आभूषण प्रदान किए, जो कभी नष्ट नहीं होते। इस दृश्य ने स्त्री धर्म, भक्ति और वैराग्य की गहन प्रेरणा दी। रामलीला समिति के अध्यक्ष अतुलेश उपाध्याय ने बताया कि शिवपुर की रामलीला सदियों से धर्म, संस्कृति और आदर्श मूल्यों के संरक्षण का साधन रही है। जयन्त और अनसूया प्रसंग से दर्शकों को यह सीख मिलती है कि सदाचार और पतिव्रता धर्म ही जीवन की सबसे बड़ी संपदा है। वहीं समिति के मंत्री संतोष मिश्रा ने कहा कि इस वर्ष भी रामलीला में अद्भुत उत्साह और आस्था देखने को मिल रही है। यह मंचन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को आदर्श जीवन की राह दिखाने का माध्यम है।
