बंदियों ने सोहर-बधाई गीतों से रचा दिव्य वातावरण

 

विशेष संवाददाता, नज़र न्यूज नेटवर्क 

 

वाराणसी। केन्द्रीय कारागार वाराणसी में चल रही दस दिवसीय रामलीला के दूसरे दिन मंगलवार को निरुद्ध बंदियों ने भगवान श्रीराम के जन्म की भावपूर्ण लीला का मंचन किया। असुरों के अत्याचार से व्याकुल पृथ्वी की पुकार पर प्रभु द्वारा अयोध्या के महाराज दशरथ के यहां अवतार लेने का आश्वासन और फिर रामजन्म का दृश्य पूरे कारागार में आस्था व उल्लास का अद्भुत संगम लेकर आया।

जन्मोत्सव के प्रसंग में जब प्रभु प्रकट हुए, तो पूरा कारागार सोहर और बधाई गीतों से गूंज उठा। बंदियों की भक्ति और भावनाओं से सजा यह मंचन दर्शकों के लिए अविस्मरणीय क्षण बन गया। इसके बाद गुरु वशिष्ठ द्वारा राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का नामकरण संस्कार कराया गया।

रामलीला में आगे महर्षि विश्वामित्र का आगमन दर्शाया गया। राक्षसों के उत्पात से व्यथित होकर वे अयोध्या पहुंचते हैं और यज्ञ की रक्षा हेतु राम-लक्ष्मण को मांगते हैं। पहले तो महाराज दशरथ दुखी होते हैं, लेकिन गुरु वशिष्ठ के समझाने पर वे सहमत हो जाते हैं। विश्वामित्र दोनों बालकों को अपने आश्रम ले जाते हैं, जहां प्रभु श्रीराम ताड़का और सुबाहू जैसे राक्षसों का वध कर धर्म की रक्षा करते हैं। प्रसंग के अंत में विश्वामित्र प्रभु को दिव्य अस्त्र-शस्त्र समर्पित करते हुए कहते हैं कि ये उनके संकल्प को सफल बनाएंगे।

रामजन्म और विश्वामित्र प्रसंग का मंचन देखने के लिए जेल परिसर में विशेष उत्साह रहा। बुधवार को फुलवारी और धनुषयज्ञ की लीलाओं का मंचन किया जाएगा।

इस अवसर पर वरिष्ठ अधीक्षक राधाकृष्ण मिश्र, चिकित्साधिकारी अभिषेक सिंह, जेलर अखिलेश कुमार, डिप्टी जेलर अखिलेश कुमार मिश्र, अमित कुमार वर्मा, अशोक कुमार राय, किशन सिंह वल्दिया, फार्मासिस्ट संदीप खरे सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

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