वाराणसी।संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी का 43 वां दीक्षांत समारोह बुधवार को अपरान्ह 3 बजे मुख्यभवन में आयोजित किया गया है।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री राकेश कुमार (IAS) ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का 43 वां दीक्षान्त-महोत्सव प्राच्य विद्या के सिद्धपीठ के रूप में सम्पूर्ण विश्व में ख्याति प्राप्त सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी अपने गौरवशाली परम्पराओं को अक्षुण्ण रखते हुये अहर्निश सेवा पथ पर अग्रसर है। सन् 1791 में संस्कृत पाठशाला या संस्कृत कालेज के रूप में स्थापित यह संस्था 22 मार्च, 1958 से वाराणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय एवं 1973 से सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप में अनेक सोपानों को पार करते हुये सम्प्रति अपनी स्थापना के उद्देश्यों की पूर्ति में अग्रसर है। वर्तमान में इस विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हमारे संस्कृत महा विद्यालय उत्तर प्रदेश सहित देश के अनेक राज्यों में कमशः नई दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, जम्मू कश्मीर, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखण्ड, लेह एवं अरूणांचल प्रदेश आदि में संचालित है।

दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल महामहिम श्रीमती आनन्दीबेन पटेल जी अध्यक्षता करेंगी।

समारोह के मुख्य अतिथि भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री परम सम्माननीय श्रीयुत गजेन्द्र सिंह शेखावत जी मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होकर अपने दीक्षान्त भाषण से स्नातकों को प्रोत्साहित करेंगे।

विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार के माननीय श्री योगेन्द्र उपाध्याय जी तथा सारस्वत अतिथि उच्च शिक्षा राज्य मंत्री माननीया श्रीमती रजनी तिवारी जी होगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा जी स्नातकों को उपाधि-पत्र प्रदान करेंगे।

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