वाराणसी।बाली, इंडोनेशिया स्थित आई जीबी सुग्रीव स्टेट हिंदू यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर रजनीश कुमार शुक्ल को हिंदू अध्ययन के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए “सर्टिफिकेट ऑफ एप्रिशिएशन अवार्ड” से सम्मानित किया है। यह सम्मान 15 अक्टूबर 2025 को सुग्रीव राज्य हिंदू विश्वविद्यालय के परिसर में आयोजित चतुर्थ वैश्विक संस्कृत सम्मेलन के समापन समारोह में प्रदान किया गया।

विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार किसी विदेशी विश्वविद्यालय के द्वारा इस संस्था के किसी प्रोफेसर को अधिकृत रूप से सम्मानित किया गया है।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कुश्ती न्गुर्ह सुदीयाना ने प्रोफेसर शुक्ल को यह अवार्ड प्रदान किया।

इस अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ के कुलपति प्रोफेसर मुरली मनोहर पाठक और हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्री प्रकाश सिंह भी उपस्थित थे।

प्रोफेसर रजनीश कुमार शुक्ल एक जाने-माने दर्शनशास्त्री, आचार्य और लेखक हैं। वह महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व कुलपति रहे हैं और भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद एवं भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के पूर्व सदस्य सचिव के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।

प्रोफेसर शुक्ल महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व कुलपति हैं और वर्तमान में संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में तुलनात्मक दर्शन और धर्म के प्रोफेसर हैं।

प्रोफेसर शुक्ल काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी से पी-एचडी की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं।

उन्होंने कई पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें “भारतीय ज्ञान परंपरा और विचारक”, “शिक्षा जो स्वर साध सके”, और “कांट का सौंदर्यशास्त्र” प्रमुख हैं। उनके सौ से अधिक शोध पत्र एवं आलेख देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।

प्रोफेसर शुक्ल को “कर्मवीर पुरस्कार 2022”, “मोस्ट डेडीकेटेड वाइस चांसलर अवार्ड”, और “वाग्योग सम्मान” जैसे कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

प्रोफेसर शुक्ल ने हिंदू अध्ययन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।उन्होंने भारतीय दर्शन, संस्कृति, और इतिहास के क्षेत्र में शोध और अनुसंधान को बढ़ावा दिया है।प्रोफेसर शुक्ल के कार्यों ने हिंदू अध्ययन के क्षेत्र में नए दृष्टिकोण और समझ को प्रदान किया है।

इस संस्था के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने प्रो रजनीश कुमार शुक्ल को विदेश की धरती से यह सम्मान न केवल प्रोफेसर शुक्ल के लिए बल्कि इस विश्वविद्यालय के लिए भी गर्व की बात है। हमें उम्मीद है कि यह सम्मान हिंदू अध्ययन के क्षेत्र में और अधिक शोध और अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा।

प्रो.शुक्ल को यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिलने से हिंदू अध्ययन के क्षेत्र में उनके योगदान को विश्व स्तर पर पहचान मिली है। हमें उनकी इस उपलब्धि पर गर्व है और हम उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *