वाराणसी। गुरुवार को शङ्कराचार्य सम्मान कार्यक्रम के दौरान ज्योतिष्पीठ के जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी महाराज ने “गुरुकुल सिखाता है: कम संसाधनों में जीवन निर्वाह” नामक पुस्तक का विमोचन किया।

इस ज्ञानवर्धक पुस्तक का संकलन उनके नैष्ठिक ब्रह्मचारी शिष्य श्री प्रभुतानंद ब्रह्मचारी जी द्वारा किया गया है।

पुस्तक का मुख्य उद्देश्य आधुनिक समाज को यह बताना है।कि कैसे प्राचीन गुरुकुल पद्धति के माध्यम से व्यक्ति न्यूनतम संसाधनों में भी श्रेष्ठ और अनुशासित जीवन जी सकता है।

विमोचन के अवसर पर आशीर्वचन देते हुए शङ्कराचार्य जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान उपभोक्तावादी संस्कृति में यह पुस्तक नई पीढ़ी को सादगी और संयम का मार्ग दिखाएगी।

महाराज जी ने प्रभूतानन्द ब्रह्मचारी जी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि गुरुकुलों का जीवन दर्शन ही वास्तविक आत्मनिर्भरता की नींव है। पुस्तक में गुरुकुलों के उन सिद्धान्तों का वर्णन है जो सिखाते हैं कि कम से कम संसाधनों में भी मनुष्य कैसे मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है।

इस अवसर पर विभिन्न पूज्य सन्तगण और वैदिक गुरुकुलम् के बटुक भारी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने इस संकलन को वर्तमान समय की महती आवश्यकता बताया।

ज्ञातव्य है कि प्रभूतानन्द ब्रह्मचारी बाल्यकाल से ही वेद शिक्षा के लिए शङ्कराचार्य जी के पास काशी आ गये थे। इन्होंने कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय शाखा का सम्पूर्ण अध्ययन किया और फिर शङ्कराचार्य जी की सेवा में आ गये और नैष्ठिक ब्रह्मचारी की दीक्षा लेकर देवार्चन व सेवा करते हुए अब विरक्त जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

उक्त जानकारी शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने दी है।

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