
समाजसेवी अंजनी कुमार सिंह प्रेमचंद मित्र सम्मान से सम्मानित

वाराणसी। प्रेमचंद की चर्चित कहानी ‘बौड़म’ एक तीखी सामाजिक,मनोवैज्ञानिक व्यंग्य कथा है, जिसमें तथाकथित सभ्य समाज की संवेदनहीनता और दोहरे मानदंडों पर करारा प्रहार किया गया है। यह कहानी किसी एक व्यक्ति के ‘पागल’ होने की नहीं, बल्कि पूरे समाज के बौद्धिक पागलपन को उजागर करती है। यह बातें साहित्यकार हिमांशु उपाध्याय ने उपन्यास सम्राट प्रेमचंद की जन्मस्थली (स्मारक) लमही में आयोजित ‘सुनो मैं प्रेमचंद’ कार्यक्रम के 1791वें दिवस पर व्यक्त किए।कार्यक्रम का आयोजन प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रेमचंद की कहानी ‘बौड़म’ का पाठ वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मिश्रा हर्ष ने किया। उनका सम्मान ट्रस्ट के संरक्षक प्रो. श्रद्धानंद, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राम सुधार सिंह, नरेंद्र मिश्र, हिमांशु उपाध्याय एवं निदेशक राजीव गोंड ने किया। समाजसेवी अंजनी कुमार सिंह को वरिष्ठ साहित्यकार डा.रामसुधार सिंह,प्रो. श्रद्धानंद और गीतकार हिमांशु उपाध्याय ने प्रेमचंद मित्र सम्मान से सम्मानित किया।
और प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि कहानी का केंद्रीय पात्र ‘बौड़म’ कहलाता है, अर्थात वह व्यक्ति जिसे समाज मानसिक रूप से असंतुलित मानकर हाशिये पर डाल देता है। किंतु जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, पाठक यह समझने लगता है कि असली ‘बौड़म’ वह व्यक्ति नहीं, बल्कि वह समाज है जो अन्याय, छल और स्वार्थ को सामान्य मान बैठा है। बौड़म की सरलता, स्पष्टवादिता और नैतिक साहस उसे समाज से अलग करती है और यही अलगाव उसे ‘पागल’ का तमगा दिला देता है। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राम सुधार सिंह ने कहा कि कहानी में नैतिकता और चालाकी के द्वंद्व को बड़ी सशक्तता से उभारा गया है। यहाँ नैतिकता पर चालाकी भारी पड़ती दिखाई देती है, जो प्रेमचंद के यथार्थवादी दृष्टिकोण को प्रकट करती है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद इस कथा के माध्यम से ‘पागलपन’ की सामाजिक परिभाषा पर गहरा सवाल उठाते हैं। नरेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि बौड़म का चरित्र अत्यंत मार्मिक है। वह न तो हिंसक है, न षड्यंत्रकारी, बल्कि एक सीधा, सच्चा और संवेदनशील मनुष्य है। उसके माध्यम से प्रेमचंद यह दिखाते हैं कि समाज में सबसे अधिक शोषण उन्हीं लोगों का होता है, जो चालाक नहीं होते। इस अवसर पर अशफ़ाक सिद्दीकी, अरविन्द विश्वकर्मा, अश्विवित दूबे, नमन श्रीवास्तव, प्रांजल श्रीवास्तव, रामजतन पाल, वाचस्पति चतुर्वेदी, , मृत्युंजय मिश्रा, अंजलि रावत, शौरभ वर्मा, सचिन शुक्ल, शंकर श्रीवास्तव, यश वर्मा , उत्कर्ष वर्मा, अभिषेक मौर्य, रतनशीला, सूर्यदीप कुशवाहा, रामजतन पाल, राहुल यादव, रोहित गुप्ता, विपनेश सिंह, संजय श्रीवास्तव, राधेश्याम पासवान आदि थे । कार्यक्रम का संचालन आयुषी दूबे, स्वागत अशोक पाण्डेय, धन्यवाद ज्ञापन वाचस्पति चतुर्वेदी ने किया।
