
वाराणसी।बीते वर्ष का अंत और नए वर्ष की शुरुआत हिन्दी साहित्य जगत के लिए गहरे शोक का कारण बनी। वर्ष 2025 के दिसंबर माह में कवि-उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल, पत्रकार-कथाकार अवधेश प्रीत और कवि नासिर अहमद सिकंदर के निधन से साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति हुई, वहीं नए वर्ष के आगमन के साथ ही सुप्रसिद्ध साहित्यकार ज्ञानरंजन के निधन ने इस दुख को और गहरा कर दिया।
इन चारों महत्वपूर्ण रचनाकारों के स्मरण में प्रगतिशील लेखक संघ, उत्तर प्रदेश द्वारा ज़ूम माध्यम से एक बड़ी ऑनलाइन शोक सभा का आयोजन किया गया। सभा की अध्यक्षता प्रख्यात कवि नरेश सक्सेना ने की। उन्होंने मौन रखकर दिवंगत साहित्यकारों का अत्यंत भावपूर्ण स्मरण किया।
कार्यक्रम के आरंभ में प्रलेस के प्रान्तीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं वरिष्ठ आलोचक प्रो. रघुवंश मणि ने शोक-प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसके पश्चात वरिष्ठ आलोचक वीरेंद्र यादव ने ज्ञानरंजन के रचना कर्म और उनके प्रेरक व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ‘पहल’ पत्रिका के माध्यम से ज्ञानरंजन ने लेखकों की पीढ़ियाँ तैयार कीं और प्रगतिशील मूल्यों को सुदृढ़ किया।
कथा समीक्षक प्रो. नीरज खरे ने विनोद कुमार शुक्ल को प्रयोगशील और लीक तोड़ने वाला कथाकार बताया, जबकि प्रो. गोरखनाथ ने अवधेश प्रीत को नब्बे के बाद की कथा पीढ़ी का महत्वपूर्ण और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा लेखक कहा। कवि-आलोचक प्रो. आशीष त्रिपाठी ने नासिर अहमद सिकंदर को मद्धिम आवेगों का संवेदनशील और श्रमिक आंदोलन से जुड़ा कवि बताया। सभा में अनेक साहित्यकारों, शिक्षकों और प्रलेस के साथियों ने सहभागिता कर दिवंगत रचनाकारों को श्रद्धांजलि अर्पित की। अंत में प्रलेस के प्रान्तीय महासचिव डा. संजय श्रीवास्तव ने आभार ज्ञापन किया तथा कार्यक्रम का संचालन प्रान्तीय उपमहासचिव संध्या नवोदिता ने किया।
