वाराणसी। बीते वर्ष का अंत और नए वर्ष की शुरुआत हिन्दी साहित्य जगत के लिए अत्यंत दुःखद रही। पिछले वर्ष दिसम्बर में कवि-उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल, पत्रकार-कथाकार अवधेश प्रीत और कवि नासिर अहमद सिकंदर का निधन हुआ, वहीं नए साल के आरम्भ में सुप्रसिद्ध साहित्यकार ज्ञानरंजन ने जीवन को अलविदा कह दिया। इन चारों महत्वपूर्ण रचनाकारों के स्मरण में प्रगतिशील लेखक संघ, उत्तर प्रदेश द्वारा ज़ूम माध्यम से एक बड़ी ऑनलाइन शोक सभा का आयोजन किया गया। अध्यक्षता प्रख्यात कवि नरेश सक्सेना ने की। प्रारम्भ में शोक-प्रस्ताव प्रलेस के प्रान्तीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. रघुवंश मणि ने रखा। वरिष्ठ आलोचक वीरेंद्र यादव ने ज्ञानरंजन के साहित्यिक योगदान को रेखांकित किया। प्रो. नीरज खरे ने विनोद कुमार शुक्ल की प्रयोगशीलता और मानवीय दृष्टि पर प्रकाश डाला। प्रो. गोरखनाथ ने अवधेश प्रीत को नब्बे के बाद की कथा पीढ़ी का महत्वपूर्ण रचनाकार बताया। प्रो. आशीष त्रिपाठी ने नासिर अहमद सिकंदर को मद्धिम आवेगों का संवेदनशील कवि कहा।सभा में अनेक साहित्यकारों ने सहभागिता कर दिवंगत रचनाकारों को श्रद्धांजलि अर्पित की। अंत में प्रान्तीय महासचिव डा. संजय श्रीवास्तव ने आभार व्यक्त किया तथा संचालन संध्या नवोदिता ने किया।
