वाराणसी। मालवीय भवन में आयोजित रविवासरीय गीता-प्रवचन कार्यक्रम में बोलते हुए प्रो. पतञ्जलि मिश्र ने कहा कि गीता मानवता का शास्त्र है, जो सम्पूर्ण मानव समाज को जीवन जीने की कला सिखाती है। उन्होंने कहा कि ईश्वर अलग-अलग युगों में विभिन्न रूपों में अवतार लेते हैं और अपनी निःश्वासभूत वाणी वेद को भी अलग-अलग शास्त्रों के रूप में अवतरित कराते हैं। कृष्णावतार में वेद का ही अवतार गीता के रूप में हुआ, जो मानवमात्र के लिए मार्गदर्शक ग्रंथ है। प्रो. मिश्र ने कहा कि गीता की किसी एक शिक्षा का भी यदि जीवन में सही ढंग से अनुपालन कर लिया जाए तो जीवन धन्य और सार्थक हो जाता है। कार्यक्रम के आरम्भ में अतिथियों का स्वागत प्रो. मृत्युञ्जय देव पाण्डेय ने किया। संगीत एवं मंच कला संकाय के छात्रों द्वारा भजन की सुंदर प्रस्तुति दी गई, जबकि गीता माहात्म्य का वाचन कुमारी सृष्टि ने किया। संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन गीता-समिति के संयुक्त सचिव प्रो. शरदिन्दु कुमार त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर प्रो. यू.पी. शाही, प्रो. आर.जी. मलिक, प्रो. सुनील कात्यायन, डॉ. अथर्व पाण्डेय, रवीश दत्त मिश्र, अरुण कुमार पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के छात्र, कर्मचारी एवं प्राध्यापक उपस्थित रहे।

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