वाराणसी।सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने जन-सामान्य को सूचित किया कि विद्या, ज्ञान एवं वाणी की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती को समर्पित बसन्त पंचमी का पावन पर्व इस वर्ष गुरुवार, 23 जनवरी 2026 को शास्त्रीय विधि-विधान एवं श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा।

कुलपति प्रो शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रामाणिक पंचांगों, धर्मशास्त्रीय मान्यताओं एवं ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार बसन्त पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी) तिथि का शुभारम्भ 22 जनवरी 2026 की मध्यरात्रि के पश्चात 23 जनवरी की प्रातः 02:29 बजे होगा, जो 23 जनवरी की मध्यरात्रि के उपरान्त 24 जनवरी 2026 की प्रातः 01:46 बजे तक प्रभावी रहेगी। इस प्रकार यह तिथि 23 जनवरी को सम्पूर्ण दिवस तथा 24 जनवरी को प्रातः 01:46 बजे तक विद्यमान रहेगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शास्त्रीय सिद्धान्त “तिथिं समनु प्राप्त उदयं याति भास्करः” के अनुसार, चूँकि 23 जनवरी 2026 को पंचमी तिथि का सूर्योदय से संयोग बन रहा है, अतः यही दिन बसन्त पंचमी पर्व एवं श्रीसरस्वती पूजन हेतु मुख्य रूप से मान्य रहेगा। साथ ही, मध्यरात्रि के उपरान्त भी पंचमी तिथि शेष रहने के कारण 24 जनवरी 2026 को सूर्योदय तक विद्यारम्भ, ज्ञान-दान, जप-तप एवं पूजनादि कर्म किए जा सकते हैं।

प्रो शर्मा ने बताया कि ज्योतिषीय दृष्टि से इस वर्ष बसन्त पंचमी पर मकर राशि में सूर्य एवं मीन राशि में चन्द्रमा का संयोग, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र तथा शिव योग का विशेष प्रभाव बन रहा है, जो ज्ञान, विद्या एवं बौद्धिक साधना के लिए अत्यन्त शुभ माना गया है। विशेष रूप से 23 जनवरी 2026 को प्रातः 07:56 बजे से अपराह्न 01:59 बजे तक श्रीसरस्वती पूजन एवं विद्यारम्भ के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त प्राप्त है।

 

कुलपति प्रो शर्मा ने कहा कि बसन्त पंचमी भारतीय संस्कृति में ऋतु परिवर्तन, नवचेतना, सृजनशीलता, कला एवं बौद्धिक जागरण का प्रतीक पर्व है। यह दिन विद्यार्थियों, शिक्षकों, साधकों एवं शोधार्थियों के लिए विशेष रूप से कल्याणकारी माना गया है। इस अवसर पर शिक्षण संस्थानों, विद्यालयों एवं सांस्कृतिक संगठनों द्वारा विविध धार्मिक-सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।

 

अन्त में प्रो॰ बिहारी लाल शर्मा ने जन-सामान्य से आह्वान किया कि वे उपर्युक्त तिथि, पुण्यकाल एवं मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए माँ सरस्वती की आराधना करें तथा बसन्त पंचमी पर्व को श्रद्धा, शांति, ज्ञान-साधना एवं उल्लास के साथ मनायें ।

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