वाराणसी। काशी के शंकराचार्य घाट पर तिथि के अनुसार गणतंत्र दिवस मनाया गया।जिसके अंतर्गत जगद्गुरुकुलम के छात्रों ने खुद को ही तिरंगे के रूप में परिवर्तित कर लिया।पूज्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य जी महाराज और ध्वज का पूजन कर ध्वजोत्तोलन किया गया।

ध्वजारोहण रमेश उपाध्याय ने करते हुए कहा कि राष्ट्र व सनातनधर्म की रक्षा चारों शंकराचार्य जी महाराज ही कर सकते हैं।गौमाता की रक्षा ही सनातनधर्म की रक्षा है।इसके लिए सभी लोगों को एकजुट होना चाहिए।

इस दौरान ब्रम्हचारी परमात्मानंद जी ने कहा कि गणतंत्र दिवस का यह दिवस चिंतन करने के लिए है कि जिस स्वतंत्र भारत के स्वरूप की कल्पना स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों द्वारा किया गया था क्या भारत उस मार्ग पर है?हमें हमारे राष्ट्र के परम्परा व नैतिक मूल्यों के स्थापना हेतु सतत् प्रयत्नशील होना होगा।

मठ के प्रबंधक कृष्ण कुमार द्विवेदी ने संचालन,जगद्गुरुकुलम के प्राचार्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

अंकिता पटेल ने वंदेमातरम व राष्ट्रगीत गाय।इस दौरान बच्चों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की गई।जगद्गुरुकुलम के विद्यार्थियों व उपस्थित लोगों ने राष्ट्रगान और गंगा गीत का गायन किया।

उक्त जानकारी देते हुए शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि पूर्व में भी परमाराध्य परमधर्माधिश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज के पावन सान्निध्य में दशाश्वेध घाट पर स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत के इतिहास का सबसे बड़ा झंडा फहराकर कीर्तिमान स्थापित किया था।और गंगा जी के तट पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम को गंगा तिरंगा का नाम दिया गया था।तब से लगातार काशी में गंगा तिरंगा कार्यक्रम तिथि के अनुसार हर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस को मनाया जाता है।आज प्रयाग में भी शंकराचार्य जी महाराज ने ध्वजारोहण करके व तिरंगारूपी गुब्बारा उड़ाकर गणतंत्र दिवस मनाए हैं।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सर्वश्री हजारी कीर्ति नारायण शुक्ला,सतीश अग्रहरि आदि लोग सहित जगद्गुरुकुलम के विद्यार्थी उपस्थित थे।

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