वाराणसी। कमच्छा स्थित वसंत कन्या महाविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग द्वारा 18 एवं 19 फरवरी 2026 को प्रातः 11:00 बजे से अपराह्न 4:00 बजे तक महाविद्यालय परिसर के कैंटीन क्षेत्र में दो दिवसीय अनुभवात्मक कार्यशाला का सफल आयोजन किया जा रहा है।
यह कार्यशाला विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता देवड़िया के कुशल निर्देशन में संपन्न हो रही है।यह कार्यशाला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अंतर्गत कौशल विकास एवं अनुभव आधारित शिक्षण की संकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से आयोजित की गई है।
इस कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय पारंपरिक शिल्प विधाओं से व्यावहारिक रूप में जोड़ना तथा ‘Learning by Doing’ की अवधारणा के माध्यम से स्वदेशी कला परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन को प्रोत्साहित करना है। कार्यक्रम के अंतर्गत दो प्रमुख शिल्प विधाओं— लिप्पन आर्ट तथा खटवा एवं मिरर वर्क — का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। लिप्पन कला, जो कच्छ (गुजरात) की प्रसिद्ध भित्ति सज्जा परंपरा है, तथा खटवा-मिरर वर्क, जो पारंपरिक कढ़ाई और दर्पण सज्जा की विशिष्ट शैली है। विद्यार्थियों को न केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति का अवसर देंगी, बल्कि उन्हें उद्यमिता के संभावित आयामों से भी परिचित कराएंगी।
कार्यशाला में लिप्पन आर्ट हेतु 113 विद्यार्थियों तथा खटवा के लिए 51 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है।जबकि 10 पंजीकरण अन्य श्रेणी में प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 8 प्राध्यापक सदस्यों ने भी सहभागिता सुनिश्चित की है, जो इस आयोजन की अकादमिक गंभीरता एवं व्यापकता को दर्शाता है।
इस कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों—डी.एम.पी.जी. कॉलेज, महादेव पी.जी. कॉलेज, पी.जी. कॉलेज गाजीपुर, घनश्याम सिंह पी.जी. कॉलेज, वनिता पॉलिटेक्निक , केशव प्रसाद मिश्र राजकीय महाविद्यालय, राजकीय महिला महाविद्यालय, रामाबाई महिला राजकीय पी.जी. कॉलेज, महारानी बनारस महिला महाविद्यालय, एम.जी.के.वी.पी., पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महिला कॉलेज तथा दीप राय इंटर कॉलेज—से विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी दर्ज कराई है। यह अंतर-संस्थागत सहभागिता इस बात का संकेत है कि पारंपरिक शिल्प कलाओं के प्रति युवाओं में गहरी रुचि एवं जागरूकता विकसित हो रही है।
कार्यक्रम में दो विशिष्ट संसाधन व्यक्तित्वों की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र है। लिप्पन आर्ट कार्यशाला का संचालन डॉ. सृष्टि पुरवार द्वारा किया जाएगा, जो फैकल्टी सेंटर ऑफ फैशन डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं तथा विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार एवं एमएसएमई, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा नामित डिज़ाइनर हैं। वहीं खटवा एवं मिरर वर्क सत्र का संचालन स्वतंत्र शिल्प विशेषज्ञ सुश्री अनन्या शर्मा द्वारा किया जाएगा, जो पारंपरिक कढ़ाई कला में विशेष दक्षता रखती हैं।
प्राचार्य प्रो रचना श्रीवास्तव के अनुसार यह कार्यशाला केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के पुनर्संवाद का माध्यम है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप यह पहल विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता एवं कौशल-आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करती है। साथ ही, यह आयोजन भारतीय स्वदेशी कला परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक सार्थक कदम सिद्ध होगा।
गृह विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित यह दो दिवसीय कार्यक्रम शैक्षणिक गुणवत्ता, व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं सांस्कृतिक संवेदनशीलता का एक उत्कृष्ट समन्वय प्रस्तुत करता है। महाविद्यालय की मैनेजर उमा भट्टाचार्य ने आशा व्यक्त की है कि इस प्रकार की पहल विद्यार्थियों को न केवल कौशल संपन्न बनाएंगी, बल्कि उन्हें सांस्कृतिक रूप से सजग एवं आत्मनिर्भर नागरिक के रूप में भी विकसित करेंगी।
इन दो दिनों में गृहविज्ञान विभाग की UG, PG एवम सर्टिफिकेट कोर्स की छात्राओं द्वारा हस्त निर्मित उत्पादों की प्रदर्शिनी आयोजित है।
