
पांच दिवसीय कार्यशाला में तीसरा दिन
वाराणसी।बुधवार को अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में “ट्रांसफॉर्मिंग पेडागॉजी इन हायर एजुकेशन: साइंसेज़, मैथमेटिक्स, सोशल साइंसेज़, ह्यूमैनिटीज़ एंड मैनेजमेंट.’ विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय कार्यशाला के तीसरे दिन के प्रथम वक्ता डॉ. सुधांशु झा, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने “पेडागॉजिकल इनोवेशन इन साइंसेज़: क्रिटिकल थिंकिंग एंड रियल-वर्ल्ड इन्क्वायरी” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में शैक्षिक नवाचार को बढ़ावा देने के लिए संस्थान अब आलोचनात्मक चिंतन और वास्तविक दुनिया की जिज्ञासा पर जोर दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका छात्रों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि उन्हें व्यावहारिक समस्याओं के समाधान खोजने के लिए प्रेरित करेगा। नई शिक्षण पद्धतियाँ छात्रों को शोध, प्रयोग और तर्कसंगत सोच की ओर अग्रसर कर रही हैं। शिक्षा जगत में इसे भविष्य की दिशा बदलने वाला कदम माना जा रहा है।
द्वितीय सत्र के वक्ता प्रो. एम. एम. त्रिपाठी, गणित विभाग, बीएचयू ने “पेडागॉजिकल इनोवेशन इन मैथमेटिक्स: क्रिटिकल थिंकिंग एंड रियल-वर्ल्ड इन्क्वायरी” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि विज्ञान शिक्षा में अब पारंपरिक तरीकों से हटकर नवाचार को अपनाया जा रहा है। नई पहल का उद्देश्य छात्रों को वास्तविक दुनिया की समस्याओं से जोड़ना और उन्हें आलोचनात्मक सोच के लिए प्रेरित करना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव से विद्यार्थियों में शोध की क्षमता और समस्या समाधान कौशल विकसित होंगे। शिक्षा जगत इसे भविष्य की पीढ़ी को अधिक सक्षम और व्यावहारिक बनाने की दिशा में अहम कदम मान रहा है।
इस पांच दिवसीय कार्यक्रम में बिहार, दिल्ली, गुजरात, झारखंड, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के 40 से अधिक प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम का संयोजन आईयूसीटीई के सभी संकाय सदस्यों द्वारा किया जा रहा है।
