वाराणसी।सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या विभाग में व्याकरण शास्त्र के व्यावहारिक एवं दार्शनिक आयामों पर एक गरिमामयी शास्त्रसंगोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि “व्याकरण वेदांगों में प्रधान शास्त्र है और यह समस्त शास्त्रों का आधार है। शब्द ही ब्रह्म है, अतः शब्द का यथार्थ ज्ञान मनुष्य को ब्रह्मविद्या की ओर अग्रसर करता है।”

उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय में प्रत्येक मास आयोजित होने वाली शास्त्रसंगोष्ठियों के लिए आवश्यक सभी संसाधनों की पूर्ति सुनिश्चित की जाएगी, जिससे शास्त्रीय विमर्श की परम्परा निरंतर सशक्त होती रहे।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता,संस्कृत भारती के विश्वविद्यालय शिक्षण प्रमुख डॉ० नितिन आर्य ने अपने व्याख्यान में पाणिनि विरचित अष्टाध्यायी के प्रत्येक अध्याय से एक-एक सूत्र प्रस्तुत करते हुए यह प्रतिपादित किया कि व्याकरणशास्त्र उतना दुरूह नहीं है, जितना सामान्यतः समझा जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आचार्य पाणिनि मूलतः एक महान भाषावैज्ञानिक थे, जिन्होंने संस्कृत वाङ्मय में निहित अनंत शब्दों के साधुत्व-निर्णय हेतु लगभग चार हजार सूत्रों की रचना की। उनका व्याकरण लौकिक एवं वैदिक दोनों प्रकार के शब्दों का साधुत्व स्थापित कर समाज को शास्त्रनिहित शब्दार्थ का यथार्थ बोध कराता है। शास्त्रवेत्ताओं के मतानुसार पाणिनि-प्रणीत व्याकरण समस्त शास्त्रों का उपकारक है। व्याकरणशास्त्र का प्रयोजन केवल शब्दार्थ-ज्ञान तक सीमित नहीं है, अपितु वेदान्त के समान मोक्षमार्ग को भी प्रशस्त करना है। कहा भी गया है कि एक शब्द के साधुत्व का सम्यक् ज्ञान मनुष्य को इस लोक और परलोक दोनों में कल्याण एवं सुख प्रदान करता है।

इटली की एमबीबीएस छात्रा एन्तोनेला ने व्याकरण एवं विज्ञान के पारस्परिक संबंधों को सरल एवं सहज भाषा में प्रस्तुत किया।

संगोष्ठी का संचालन संस्कृत विद्या विभाग के आचार्य डॉ० रविशंकर पाण्डेय ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए व्याकरण-ज्ञान के व्यावहारिक स्वरूप को स्थापित किया तथा बताया कि संस्कृत के छात्रों के लिए व्याकरण का ज्ञान अनिवार्य है।यह संगोष्ठी शास्त्रीय परंपरा और आधुनिक दृष्टि के समन्वय का प्रेरक उदाहरण सिद्ध हुई।

धन्यवाद ज्ञापन छात्रकल्याणसंकाय अध्यक्ष प्रोफेसर शैलेश कुमार मिश्र द्वारा किया गया। ।

इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर सूचना एवं ग्रंथालय विज्ञान विभाग के अध्यक्ष हीरककांति चक्रवर्ती , सामाजिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एवं पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो० राजनाथ जी एवं वेद विभाग के वेद के विद्वान् डॉ० सत्येंद्र यादव जी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम में अनेक छात्रों का शोध पत्र वाचन हुआ।जिसमें व्याकरण शास्त्र के व्यावहारिक पहलुओं का उद्भावन किया गया।

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