वाराणसी। उदय प्रताप कॉलेज के कृषि संकाय द्वारा स्टूडेंट रेडी प्रोग्राम के अंतर्गत निहित ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (आरएडब्ल्यूई) तथा उन्नत भारत अभियान के तहत वाराणसी के दानियालपुर गांव में किसान पाठशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा अनुशंसित कृषि स्नातक पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष में शामिल स्टूडेंट रेडी प्रोग्राम के अंतर्गत आयोजित किया गया। चयनित गांव दानियालपुर में यह आयोजन कृषि शिक्षा को ग्रामीण परिवेश से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दानियालपुर (वर्तमान में नगर निगम क्षेत्र) के पार्षद गोविंद पटेल ने गांव की कृषि विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह क्षेत्र फल, सब्जी एवं पुष्प उत्पादन—विशेषकर पपीता, मिर्च, बैंगन, गाजर, गेंदा एवं गुलाब—की खेती के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने बताया कि यह गांव तीन ओर से वरुणा नदी से घिरा है तथा शहर के निकट होने के कारण उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों के लिए अत्यंत अनुकूल है। उन्होंने जानकारी दी कि दानियालपुर यूपीडास्प योजना के अंतर्गत जनपद के चयनित अग्रणी गांवों में शामिल है।

विषय विशेषज्ञ के रूप में कृषि कीट विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सत्य शरण ने मधुमक्खी पालन पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन से शहद के अतिरिक्त मोम, रॉयल जेली, मधुमक्खी विष एवं प्रोपोलिस जैसे मूल्यवान उप-उत्पाद प्राप्त होते हैं, जिनकी बाजार में उच्च मांग है। उन्होंने किसानों को अवगत कराया कि लगभग चार हजार रुपये की लागत से एक मधुमक्खी बॉक्स के साथ शुरुआत की जा सकती है तथा 50 बॉक्स तक विस्तार करने पर सरकारी अनुदान के लिए आवेदन संभव है। पशु पालन एवं दुग्ध विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. पुष्पराज शिवहरे ने पशुओं की प्रमुख बीमारियों, उनके बचाव एवं उपचार संबंधी जानकारी दी। उन्होंने पशुशाला को हवादार रखने, संक्रामक रोगों की सूचना समय पर जिला पशुपालन विभाग को देने तथा खुरपका-मुंहपका जैसी विषाणुजनित बीमारियों से बचाव हेतु वर्षा ऋतु से पूर्व टीकाकरण कराने की सलाह दी। सस्य विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. देव नारायण सिंह ने जैविक खेती के महत्व एवं फल-सब्जियों के जैविक उत्पादन की विधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गांव में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों—जैसे गोबर, गोमूत्र, नीम की निबौली आदि—का उपयोग कर कम लागत में अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है।

कृषि अर्थशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. दुष्यन्त कुमार ने कृषि विपणन, लागत प्रबंधन तथा कृषि वित्त के विभिन्न पहलुओं पर उपयोगी जानकारी प्रदान की।

कार्यक्रम का संचालन पादप प्रजनन एवं आनुवांशिकी विभाग की प्रो. प्रज्ञा पारमिता ने किया। अतिथियों का स्वागत संकायाध्यक्ष प्रो. राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शशि बाला द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर डॉ. अमित चौहान एवं डॉ. अशोक कुमार सिंह सहित अन्य अध्यापकगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजन में उद्यान विज्ञान विभाग के शोध छात्र आशुतोष मिश्रा का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में लगभग 20 किसानों तथा कृषि स्नातक अंतिम सेमेस्टर के 65 छात्र-छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता की। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर व्यावहारिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।

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