
वाराणसी। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित माय भारत वाराणसी के सहयोग से “विकसित भारत यूथ संसद” का जिला स्तरीय कार्यक्रम गुरुवार को उदय प्रताप कॉलेज, वाराणसी में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न महाविद्यालयों से आए 93 युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य विषय “आपात काल के 50 वर्ष – भारतीय लोकतंत्र के लिए सबक” रहा।
प्रतिभागियों ने लगभग तीन मिनट के भाषण के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए। युवाओं ने वर्ष 1975 में लागू आपातकाल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसके सामाजिक- राजनीतिक प्रभाव तथा भारतीय लोकतंत्र के लिए उससे मिलने वाले महत्वपूर्ण सबकों पर अपने तर्कपूर्ण और प्रभावशाली विचार प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर उदय प्रताप कॉलेज के प्राचार्य प्रो. धर्मेन्द्र प्रताप सिंह तथा जिला युवा अधिकारी यतेन्द्र सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ विकसित करने तथा देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. सतीश प्रताप सिंह और प्रो. अग्नि प्रकाश सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने आयोजन समिति के प्रमुख सदस्यों के रूप में कार्यक्रम की रूपरेखा और संचालन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रो. सुधीर कुमार राय, प्रो. जितेन्द्र कुमार सिंह, डॉ. उमाकांत सिंह, डॉ. अतुल कुमार सिंह तथा डॉ. श्वेता सोनकर शामिल रहे।
उन्होंने प्रतिभागियों का मूल्यांकन विषय की प्रासंगिकता, प्रस्तुति की स्पष्टता, मौखिक संचार एवं शारीरिक भाषा, नवाचार एवं रचनात्मकता, भाषा एवं प्रवाह तथा निर्धारित समय के पालन जैसे मानकों के आधार पर किया।
कार्यक्रम के अंत में 93 प्रतिभागियों में से चयनित शीर्ष 10 विजेताओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। चयनित प्रतिभागी सर्वश्री सृष्टि पांडे, सक्षम राय, स्वर्णिम सिंह, जाहनवी कुशवाह, अनिकेत मिश्रा, सात्विक त्रिपाठी, जय प्रताप सिंह, अभिनव त्रिपाठी, उत्कर्ष तिवारी, कृतिका पांडेय है।विजेताओं को लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश विधान सभा में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त होगा।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, आयोजक गण तथा बड़ी संख्या में छात्र -छात्राएँ उपस्थित रहे। इसका उद्देश्य युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, नेतृत्व क्षमता का विकास करना तथा उन्हें राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ना है।
