वाराणसी। शुक्रवार को कंपोजिट विद्यालय, छित्तूपुर खास, बीएचयू, वाराणसी में वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई: 014A द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष एनएसएस शिविर का चौथा दिन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।  

सुबह स्वयंसेवकों की उपस्थिति दर्ज करने के साथ हुई, उसके बाद एनएसएस ताली, थीम गीत और हम होंगे कामयाब गीत के साथ शिविर की शुरुआत हुई। 

कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शशि प्रभा कश्यप के मार्गदर्शन में सात दिवसीय विशेष एनएसएस शिविर की थीम “युवाओं में कौशल विकास” रखी गई थी, इस सत्र का मुख्य उद्देश्य “रचनात्मकता से रोजगार की ओर” में कला और शिल्प कौशल के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाता था । 

इस सत्र में वाराणसी की पिडिलाइट कंपनी की जानी-मानी कला और शिल्प विशेषज्ञ श्रीमती नीतू घोषाल ने अतिथि प्रशिक्षक के रूप में भाग लिया। डॉ. कश्यप ने अतिथि वक्ता का स्वागत किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य पारंपरिक कला से आगे बढ़कर यह दिखाना था कि रचनात्मक कौशल को सीधे तौर पर रोजगार और उद्यमिता से कैसे जोड़ा जा सकता है।

श्रीमती घोषाल ने एक गहन व्यावहारिक सत्र आयोजित किया, जिसमें उन्होंने स्वयंसेवकों को फैब्रिक पेंटिंग, क्ले मॉडलिंग (मिट्टी के मॉडल बनाना) में ढोकरा आर्ट, क्ले से ईयररिंग बनाना और “बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट” (कचरे से उपयोगी वस्तुएँ बनाना) में पेबल आर्ट या छोटे छोटे पत्थरों से शो पीस, पेपर वेट, मिट्टी के फेंके गए कुल्हाड़ों से शो पीस बनाना इत्यादि कई रचनात्मक तकनीकें सिखाईं।

 इस सत्र में श्रीमती घोषाल ने यह प्रदर्शित किया कि कैसे पारंपरिक शिल्प तकनीकों को, जब पेशेवर बारीकियों के साथ निखारा जाता है, तो वे रोजगार और उद्यमिता के विशाल अवसर खोल सकती हैं। फैब्रिक पेंटिंग से लेकर पुनर्चक्रित सामग्री से उच्च-स्तरीय सजावटी वस्तुएँ बनाने तक, इस प्रशिक्षण ने छात्रों को अपने स्वयं के छोटे पैमाने के व्यवसाय शुरू करने के लिए एक रूपरेखा प्रदान की।

उन्होंने समझाया कि इन कौशलों के माध्यम से युवा इंटीरियर डेकोरेशन, बुटीक व्यवसाय और स्वतंत्र कलाकार (फ्रीलांस आर्टिस्ट) के रूप में अपना करियर कैसे बना सकते हैं। और युवा अपनी बनाई हुई वस्तुओं को बेचने के लिए सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का उपयोग कैसे कर सकते हैं, जिससे एक स्थानीय शिल्प को वैश्विक व्यवसाय में बदला जा सके।

श्रीमती घोषाल ने कहा कि “कला अब केवल किसी गैलरी की दीवारों तक ही सीमित नहीं रह गई है। आज की डिजिटल अर्थव्यवस्था में, एक कुशल कारीगर स्वयं-निर्मित उद्यमी होता है। ‘वोकल फॉर लोकल’ (स्थानीय के लिए मुखर) जैसे इन कौशलों में महारत हासिल करके, हमारे युवा नौकरी चाहने वालों से नौकरी देने वालों की भूमिका में आ सकते हैं।”

डॉ. शशि प्रभा कश्यप ने इस बात पर जोर देते हुए सत्र का समापन किया कि एनएसएस का मिशन एक आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि इस तरह का कौशल-आधारित प्रशिक्षण यह सुनिश्चित करता है कि वीकेएम, बीएचयू के युवा आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए आवश्यक व्यावहारिक उपकरणों से सुसज्जित हों। 

50 स्वयंसेवकों ने व्यावहारिक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्रशिक्षण सत्र के दौरान अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। यह सत्र अत्यंत प्रेरणादायक, क्रिएटिव एवं ज्ञानवर्धक रहा उसके बाद शिविर का समापन राष्ट्रगान तथा स्वयंसेवकों द्वारा बनाई गई विभिन्न उपयोगी वस्तुओं की एक प्रदर्शनी के साथ हुआ, जिसमें नवाचार और पारंपरिक कलात्मकता का एक सुंदर मेल देखने को मिला।

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