
वाराणसी।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई), वाराणसी में “फ्रॉम डेटा टू इनसाइट्स: स्टैटिस्टिकल एनालिसिस विद फ्री एंड एआई-ड्रिवन टूल्स” विषय पर छह दिवसीय शॉर्ट टर्म कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
दूसरे दिन के प्रथम सत्र के वक्ता प्रो. गौतम बंद्योपाध्याय, पूर्व प्रोफेसर, प्रबंधन अध्ययन विभाग, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दुर्गापुर ने “डेटा हैंडलिंग इन एक्सेल” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार डेटा को व्यवस्थित, विश्लेषित और प्रस्तुत करके निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सकता है।
इस सत्र में प्रतिभागियों को एक्सेल के उन्नत उपकरणों के उपयोग से कार्य को सरल बनाने और रिपोर्टिंग में सटीकता बढ़ाने के उपाय सिखाए गए। साथ ही, उन्होंने जोर दिया कि डेटा प्रबंधन में दक्षता आज के शिक्षक तथा छात्रों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
द्वितीय सत्र में उन्होंने “एक्सप्लोरेटरी डेटा एनालिसिस (ईडीए)” विषय पर व्याख्यान दिया ।
उन्होंने बताया कि भारत में डेटा साइंस के क्षेत्र में एक्सप्लोरेटरी डेटा एनालिसिस का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। यह तकनीक बड़े डेटा सेट को समझने और उसमें छिपे पैटर्न खोजने में मदद करती है। ईडीए के ज़रिए कंपनियाँ अपने निर्णय अधिक सटीक और प्रभावी बना रही हैं।
कार्यशाला के तृतीय सत्र में डॉ. पराग बी. शाह, एसोसिएट प्रोफेसर, एच. एल. कॉलेज ऑफ कॉमर्स, अहमदाबाद ने “कन्सेप्ट ऑफ डायग्नोस्टिक एनालिटिक्स एंड इंट्रोडक्शन टू हाइपोथीसिस टेस्टिंग” विषय पर व्याख्यान दिया ।
उन्होंने बताया कि यह तकनीक किसी समस्या के मूल कारण को समझने और डेटा से गहराई में निष्कर्ष निकालने में मदद करती है। साथ ही, उन्होंने बताया कि शोध जगत में हाइपोथीसिस टेस्टिंग को वैज्ञानिक निर्णय लेने का आधार माना जाता है। इस प्रक्रिया के ज़रिए शोधकर्ता यह परखते हैं कि कोई धारणा या अनुमान वास्तविक डेटा पर कितना सही बैठता है।
अंतिम सत्र में डॉ. राजू डी. चौधरी, एसोसिएट प्रोफेसर, एम. जी. साइंस इंस्टीट्यूट, अहमदाबाद ने “इंट्रोडक्शन टू जैमोवी (इंटरफेस, डेटा इम्पोर्ट, वर्कफ़्लो)” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि भारत में सांख्यिकीय विश्लेषण के लिए जामोवी सॉफ्टवेयर का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसका इंटरफ़ेस बेहद सरल है, जिससे नए शोधकर्ताओं को भी इसके उपयोग में आसानी होती है। इस प्लेटफ़ॉर्म पर डेटा इम्पोर्ट करना अत्यंत आसान है तथा विभिन्न फ़ाइल फ़ॉर्मेट्स को आसानी से लोड किया जा सकता है। शोध कार्यों के लिए इसका वर्कफ़्लो स्पष्ट और व्यवस्थित है, जिससे विश्लेषण तेज़ी से किया जा सकता है।
इस छह दिवसीय कार्यक्रम में महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश सहित 10 राज्यों के 37 से अधिक प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं। इस कार्यक्रम का संयोजन डॉ. दीप्ति गुप्ता, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई तथा सह-संयोजन श्री सी. डी. राणा, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष, आईयूसीटीई कर रहे हैं।









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