24 जुलाई को लखनऊ में चतुरंगिनी सेना के साथ खड़े होंगे 2,18,700 सैनिकों की एक अक्षौहिणी सेना, गौ माता की रक्षा के लिए— जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज

 

 

देवरिया। गविष्टि (गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध) का तृतीय दिवस वैकुंठपुर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

मंगलवार को परमाराध्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के सान्निध्य में श्री राम मंदिर, वैकुंठपुर में एक विशेष गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें विद्वानों, संस्कृत विद्यार्थियों एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।

यात्रा के दौरान मुंडेरा बाबू, बंजरिया चौराहा रोड, कंचनपुर चौराहा, कसया रोड, सोनुघाट चौराहा तथा लक्ष्मी नारायण मंदिर-शिवबनकटा सहित विभिन्न स्थानों पर जनसमुदाय ने उत्साहपूर्वक स्वागत करते हुए गौ रक्षा का संकल्प लिया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने कहा कि गौ रक्षा केवल एक नारा नहीं, बल्कि समाज का कर्तव्य और सांस्कृतिक दायित्व है।

उन्होंने गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इस विषय पर ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गौ संरक्षण के लिए केवल प्रतीकात्मक प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इसके लिए सशक्त नीतियां और ठोस कानून बनाए जाने आवश्यक हैं। महाराजश्री ने घोषणा की कि आगामी 24 जुलाई को लखनऊ में गौ रक्षा के समर्थन में एक विशाल जनसमूह एकत्रित होगा, जिसमें देशभर से श्रद्धालुओं एवं समर्थकों की भागीदारी अपेक्षित है। यह यात्रा समाज में जागरूकता फैलाने, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और गौ रक्षा के प्रति जनभागीदारी को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। अंत में आयोजन समिति की ओर से सभी उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया गया।

महाराजश्री ने बताया कि उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से केवल दो माँगें की थीं — गाय को राज्य माता घोषित करना और उसे पशु सूची से हटाकर एक सम्मानित पृथक सूची में रखना।

उन्होंने स्मरण दिलाया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शिंदे ने यही कार्य उनके आग्रह पर कर दिखाया था और उसके विरुद्ध न कोई कोर्ट गया, न कोई कानून आड़े आया। उन्होंने कहा कि पुलिस थाने में भी “गाय” शब्द नहीं लिखा जाता, बल्कि “मवेशी” लिखा जाता है और सरकारी आँकड़ों में “cattle” लिखा जाता है — यह गाय की गरिमा का अपमान है, जिसे अब सहन नहीं किया जाएगा।

महाराजश्री ने भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस — सभी दलों को एक साथ आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इनमें से कोई भी भारत की मूल सनातनी विचारधारा की राजनीति नहीं करता। उन्होंने कहा कि भाजपा पूंजीवादी विचारधारा लेकर अमेरिका की राह पर चलती है, कांग्रेस की नींव ब्रिटिश राजनीति पर टिकी है, समाजवादी रूस से प्रभावित हैं और साम्यवादी चीन से। उन्होंने प्रश्न उठाया कि राम, कृष्ण और विक्रमादित्य की परंपरा वाली भारतीय मूल राजनीति को कौन जीवित रखेगा?

उन्होंने आह्वान किया कि अब सनातनी विचारधारा की एक स्वतंत्र राजनीतिक धारा का समय आ गया है।

महाराजश्री ने स्पष्ट किया कि साधु-सन्यासी का कार्य सीधे सांसारिक पद ग्रहण करना नहीं है — जो संसार छोड़ चुका है, वह मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री अथवा विधायक नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि जो गृहस्थ सनातनी वेद, शास्त्र और परंपरा को प्रमाण मानते हुए राजनीति में आना चाहें, उन्हें समाज का भरपूर समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि देश की 70 करोड़ सनातनी जनता आज नेतृत्व के अभाव में 30 करोड़ के पीछे चलने को विवश है — यह विडंबना तभी दूर होगी जब सनातनी विचारधारा की राजनीति को प्रोत्साहन मिलेगा।

सम्बोधन के अंत में महाराजश्री ने घोषणा की कि यदि 81 दिनों की यात्रा पूर्ण होने तक भी सरकार ने गौ रक्षा की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो 24 जुलाई को लखनऊ में एक चतुरंगिनी सेना के साथ खड़े होकर अगले चरण की घोषणा की जाएगी। महाभारत के अनुसार एक चतुरंगिनी सेना में 2,18,700 सैनिक होते हैं, और इतनी एक अक्षौहिणी सेना के साथ इस अभियान का अगला चरण प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने सभी को 1008.guru पर पंजीकरण कराने का आह्वान किया।

गोष्ठी के अंत में ऋग्वेद के मंत्र “अहं अनं वृत्रं गविष्टो” के साथ सामूहिक शपथ ली गई — “इस गविष्टि धर्मयुद्ध में गौ माता को सताने वाले असुर को हम पराजित करेंगे।”

 

उक्त जानकारी परमधर्माधिश शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने दी है।

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