प्रभु चर्चा में थोड़ा समय लगेगा, कल्याण उसी में निहित है

मानस प्रवचन का छठवां दिन

वाराणसी। अखिल भारतीय सनातन न्यास, जैतपुरा वाराणसी द्वारा आयोजित रामकथा के षष्टम दिवस पर पातालपुरी पीठाधीश्वर पूज्य संत जगतगुरु बालक देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि जनकपुर में सीता स्वयंवर में प्रभु राम जी ने जब धनुष भंजन किया तो इस समाचार को महाराज जनक ने मुनि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर अपने राज्य से दूत भेज कर चक्रवर्ती सम्राट महाराज दशरथ को अयोध्या में चारों भाइयों और नगर निवासियों सहित बारात लेकर मिथिला पहुंचने का आमंत्रण पत्र दिया। दूत पुनः जनकपुर लौट गये। इसके बाद यह समाचार जब राजमहल में राजा ने सभी रानियां सहित गुरु वशिष्ठ सहित सभी को खुशी-खुशी सुनाया तब गुरु वशिष्ठ जी की आज्ञा पाकर बारात जनकपुर के लिए चल पड़ी तथा मिथिला में चारों भाइयों का बड़े ही स्वागत सत्कार के साथ महाराज जनक ने दही चूड़ा सहित महाराज दशरथ, गुरु वशिष्ठ का बड़े ही आदर के साथ भोजन कराकर आशीर्वाद प्राप्त किया। फिर खुशी-खुशी चारों भाई अपनी अपनी रानियों के साथ पुनः अयोध्या लौट चले। उस समय का राजमहल का माहौल काफी उल्लास पूर्ण रहा।

इस अवसर पर कथा व्यास पंडित वेद प्रकाश मिश्र कलाधर ने आज की युवा पीढ़ी को बताया कि हमें मंदिर में पूजन कैसे करना चाहिए तथा हमें हमारी दिनचर्या में कुछ समय प्रभु चर्चा में अवश्य लगाना पड़ेगा इसी में हमारा कल्याण संभव हैं।

शनिवार को व्यास पीठ की आरती विधायक व पूर्व मंत्री डॉक्टर नीलकंठ तिवारी, संदीप चतुर्वेदी, आलोक चंद्र शुक्ला, डॉ अजय जायसवाल, जयशंकर गुप्ता, प्रमोद यादव मुन्ना, ज्ञानचंद मौर्य, विष्णु गुप्ता, भुवाल जी एडवोकेट, डॉ अलका जायसवाल, अर्चना गुप्ता, असीम बाबू, राधा गुप्ता, दीप्ति तिवारी आदि ने उतारी।

मंच का संचालन प्रधान सचिव राजेश सेठ ने किया।

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