झारखंड में कार्यशाला के समापन अनुभव व निष्कर्ष का किया सांझा

 

झारखंड।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई), वाराणसी तथा डिग्री कॉलेज बरही, चंदवारा, झारखंड के संयुक्त तत्वावधान में छः दिवसीय “समतामूलक उच्च शिक्षा: भारतीय ज्ञान परंपरा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एकीकरण” विषयक संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) का समापन डिग्री कॉलेज बरही, चंदवारा परिसर में हुआ।

समापन दिवस पर प्रतिभागियों ने समूह प्रस्तुतियों के जरिए प्रशिक्षण के अनुभव और निष्कर्ष साझा किए। मुख्य वक्ता प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई ने सुशासन, नेतृत्व, संस्थागत विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थान की सफलता सुशासन, दूरदर्शी नेतृत्व, मजबूत संस्थागत ढांचे पर निर्भर करती है।

उन्होंने डिजिटल युग में सूचना के सत्यापन की जरूरत बताई। भ्रामक खबरों से सावधान रहने की अपील की। प्रो. श्रीवास्तव कहा कि कृत्रिम ने बुद्धिमत्ता (एआई) नेतृत्व या मानवीय बुद्धिमत्ता का विकल्प नहीं है। यह सहायक उपकरण है। इसका प्रभावी उपयोग निरंतर अभ्यास, अनुभव से सीखा जा सकता है। समापन सत्र में कार्यक्रम संयोजक, पीएम-उषा नोडल पदाधिकारी डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने प्रतिभागियों, विशेषज्ञों, आयोजकों के प्रति आभार जताया।

इस पहल के अंतर्गत झारखंड के रामगढ़ तथा चतरा जिलों में समानांतर रूप से कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम के निदेशक प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई तथा प्रो. मिथिलेश कुमार सिंह, सीसीडीसी विभावि, हजारीबाग, झारखंड हैं, जबकि इसका समन्वयन डॉ. राजा पाठक, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई, डॉ. दीप्ति गुप्ता, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई, एवं डॉ. अरुण कुमार मिश्रा, विभावि, हजारीबाग द्वारा किया जा रहा है।

कार्यक्रम के संचालक प्राचार्य डॉ. जयप्रकाश आनंद ने इसे शिक्षकों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी बताया। छः दिनों तक चले कार्यक्रम में जिले के विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की।

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