प्रेमचंद का यथार्थवाद आज भी प्रासंगिक :- डॉ. रामसुधार सिंह

वाराणसी। प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र की ओर से लमही में आयोजित ‘सुनो मैं प्रेमचंद’ कार्यक्रम के 1938वें दिवस पर मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी “जुगनू की चमक” का पाठ किया गया। कार्यक्रम में कहानी का पाठ नाथ सोनांचली ने किया। कहानी की समीक्षा करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामसुधार सिंह ने कहा कि प्रेमचंद की सबसे बड़ी विशेषता उनका यथार्थवाद है। उन्होंने बताया कि “जुगनू की चमक” समाज की उस मानसिकता पर तीखा प्रहार करती है, जिसमें लोग किसी व्यक्ति की वास्तविकता को समझने के बजाय उसकी बाहरी चमक-दमक से प्रभावित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, धन और प्रसिद्धि के इस दौर में कहानी की प्रासंगिकता और बढ़ गई है।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर डॉ. छोटेलाल ने एकल काव्यपाठ भी प्रस्तुत किया। सभी का स्वागत केंद्र के निदेशक राजीव गोंड ने किया। इस अवसर पर साहित्यप्रेमियों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। संचालन आयुषी दूबे, स्वागत मनोज विश्वकर्मा तथा धन्यवाद ज्ञापन रोहित गुप्ता ने किया।

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