
जापर हो कृपा बाबा काल भैरव जी की
काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव जी की महिमा का जब से मैंने होश में आया तब से अपने से बड़े लोगों से सुना। परंतु बाबा के शरण में आने का अवसर मुझे 1990 में मिला।
वैसे तो 1954 से बाबा काल भैरव जी का शोभा यात्रा निकाली जा रही है।
1990 में हम पांच मित्र जिसमें मुरली मनोहर सिंह, प्रदीप जौहरी, रामचंद्र सेठ, कन्हैयालाल सेठ, कैलाश सिंह विकास ने सोचा कि हम लोगों को इस पुनीत कार्य में और क्या कर सकते हैं। निर्णय लिया गया कि शोभायात्रा के एक दिन पूर्व हम सभी मंदिर परिसर का अच्छे ढंग से सफाई खुद करेंगे। यही सभी पांचों मित्र सेवा कार्य प्रारंभ किया।
1990 के प्रथम वर्ष पांचों मित्र मंदिर परिसर की सफाई कर बाबा काल भैरव जी के शयन आरती में शामिल हुए। उस सुखद अहसास को कोई शब्द ही नहीं है।
1991 कन्हैयालाल सेठ को एक पुत्र रत्न की प्राप्ति साथ ही सभी का निष्ठा पूर्ण रुप से समर्पित हो गया। इसी के दो वर्ष पश्चात् रामचंद्र सेठ का विवाह भी हो गया। फिर भी रात्रि का सफाई सेवा जारी रहा। धीरे धीरे सफाई सेवा और भी मित्र स्वेच्छा से जुड़ कर सेवा कार्य करने लगे। दूसरे दिन शोभा यात्रा में शामिल होना। मंदिर में बाबा के पूजा व प्रसाद में वितरण सहित जो भी आदेश होता था।वह मनोयोग से सम्पन्न किया जाता था।यह कारवां शनै शनै हर साल बढ़ता चला गया।
इस क्रम में रात्रि 9 बजे मंदिर परिसर की सफाई हेतु सफाई सामग्री लेकर जब हमलोग पहुंचे तो गर्भगृह में उसी समय अपने पाली के प्रमुख सेवक पंडित जी ने इशारा कर मुझे बुलाया तथा कहा कि गर्भगृह में ऊपर कपूर व दीपक जलने के कारण चारों तरफ काला हो गया है उसे ऊपर चढ़ कर साफ़ करो। मैं तो जरा सा भी साहस नहीं जुट पाया, बाबा के ऊपर पैर रख कर ऊपर चढ़ सफाई सेवा करने का।
अभी सोच रहा था कि अब मैं इस आदेश का पालन कैसे करुं। तभी कड़क आवाज में पंडित जी ने कहा सुनो सबसे पहले बाबा का चरण छूकर आशीर्वाद लो,जल दे रहा हूं उसे ग्रहण कर पैर कर ऊपर चढ़ जाओ,हम देख रहे हैं।
जैसा आदेश मिला वैसे आदेशानुसार ऊपर चढ़ कर ऊपर जमा हुए काला की सफाई कर जैसे नीचे उतरा। तुरंत पंडित जी का आदेश मिला चलो भी माथा टेको, जल पियो, पूरे शरीर को साफ कर रात्रि शयन आरती में शामिल हो।
मैंने भी वैसा ही किया। हां उस समय पूर्ण रूप से मैं तो काला पहले से था।गंजी,पैंट भी काला हो कर नया रुप दे दिया। रात्रि में बाबा काल भैरव जी के शयन आरती में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। शयन आरती के पश्चात पंडित जी ने मुझे बुलाया एक पेड़ा प्रसाद में दिया साथ में आदेश भी था यह प्रसाद अकेले ही खाओ।
कुछ वर्ष पश्चात् किसी विषय पर मेरा मतभेद हो गया। मैंने निर्णय लिया कि इस वर्ष सफाई सेवा करेंगे शोभायात्रा में शामिल नहीं होंगे।
सफाई सेवा किया गया। सुबह अपने मित्र के पिताश्री को लखनऊ पीजीआई में दिखना था। लक्सा स्थित उनके होटल सो गए। ऐसा सोए लगभग 7 बजे सभी का खुला,तब तक वरूणा रेलगाड़ी हमसे कोसों दूर।
लक्सा से स्नान कर जब शोभायात्रा में शामिल होने के आया तो सभी ने खूब सुनाया। लेकिन शोभायात्रा में शामिल हो कर जो आंनद आया। वह अपार सुखद रहा।
हर वर्ष नियमित शामिल होता रहा।जो टीम मंदिर परिसर सेवा का था।पता नहीं कैसे उस सेवा कार्य से हमारी टीम को मुक्ति मिल गई।
एक विशेष निर्णय मिला अब 24 घंटे बाबा की सेवा में रहेंगे। जो अभी जारी है अब जिस पल बाबा का प्रथम आशीर्वाद मिलता है। उससे 24 घंटा पूर्ण होते घर वापसी का सकेत हो जाता है।
हां मैं बाबा काल भैरव जी का कृपा मानता हूं कि शोभायात्रा में जो काठ की हबेली से शुरू हो कर तीन थाना क्षेत्र से गुजरने वाला शोभायात्रा में विराजमान बाबा के रथ से भक्तगण को दर्शन करने की जिम्मेदारी मिली है। वह अभी तक जिम्मेदारी से सम्पन्न कराने में बाबा का आशीर्वाद रहा। जो आशा है जारी भी रहेगा।
साढ़े तीन दशक में बाबा काल भैरव जी का आशीर्वाद हम सभी पर जो बना है। बाबा का यह आशीर्वाद आजीवन कृपा बनी रहे।
जय बाबा काल भैरव जी की।












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