
झारखंड ।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई), वाराणसी तथा गिरिडीह कॉलेज, गिरिडीह, झारखंड के संयुक्त तत्वावधान में छः दिवसीय “समतामूलक उच्च शिक्षा: भारतीय ज्ञान परंपरा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एकीकरण” विषयक संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) का समापन गिरिडीह कॉलेज, गिरिडीह परिसर में हुआ। विशिष्ट अतिथि के रूप में ऑनलाइन जुड़े प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, बीएचयू, वाराणसी ने कार्यक्रम की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था में भारतीय ज्ञान परंपरा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समन्वय उच्च शिक्षा को अधिक समावेशी, प्रासंगिक और भविष्य उन्मुख बनाएगा। कार्यक्रम के संरक्षक एवं विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा भी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। उन्होंने छः दिनों तक कार्यक्रम के सफल संचालन में योगदान देने वाले सभी प्रतिभागियों, संसाधन व्यक्तियों और आयोजकों को बधाई दी तथा इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता और महत्व को रेखांकित किया। समापन समारोह में डॉ. पुष्पा सिन्हा, पूर्व प्राचार्या, आर.के. महिला कॉलेज, गिरिडीह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने शिक्षकों से भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के संतुलित उपयोग के माध्यम से विद्यार्थियों के समग्र विकास की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया। इसके पश्चात प्रतिभागियों की ओर से कार्यक्रम के छह दिनों के प्रमुख निष्कर्षों एवं अनुभवों की प्रस्तुति दी गई। डॉ. मिथिलेश महत्ता (आदर्श कॉलेज, राजधनवार) तथा डॉ. कृष्ण कुमार (आदर्श कॉलेज, राजधनवार) ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रमुख प्रतिफलों, शिक्षण एवं शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग, भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता तथा उच्च शिक्षा में समानता आधारित दृष्टिकोण पर विस्तृत सार प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंतिम दिन शिक्षकों द्वारा समूह प्रस्तुतियाँ दी गईं तथा पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम के निष्कर्षों और उपलब्धियों पर विस्तृत चर्चा की गई।
समापन दिवस के प्रथम एवं द्वितीय तकनीकी सत्रों के मुख्य वक्ता प्रो. आशीष श्रीवास्तव रहे। उन्होंने सुशासन, नेतृत्व और संस्थान तथा संस्थागत योजना निर्माण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता विषयों पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की सफलता उसके सुशासन, दूरदर्शी नेतृत्व और सशक्त संस्थागत ढाँचे पर निर्भर करती है। उन्होंने डिजिटल युग में सूचना के सत्यापन के महत्व पर बल देते हुए कहा कि “आज के दौर में यह विचार करना आवश्यक है कि किसी सूचना को आगे बढ़ाने से पहले कितने लोग उसकी सत्यता की जाँच करते हैं। दुर्भाग्यवश भ्रामक और झूठी खबरें अक्सर शोध-समीक्षित पत्रिकाओं में प्रकाशित ज्ञान से भी अधिक तेजी से फैलती हैं।” वहीं गिरिडीह कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मृगेन्द्र नारायण सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि यह संकाय विकास कार्यक्रम शिक्षकों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी और व्यावहारिक दृष्टि से अत्यंत उपयोगी रहा है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों, अतिथियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस पहल के अंतर्गत झारखंड के रामगढ़, कोडरमा तथा चतरा जिलों में समानांतर रूप से कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में 150 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम के निदेशक प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई तथा प्रो. मिथिलेश कुमार सिंह, सीसीडीसी विभावि, हजारीबाग, झारखंड हैं, जबकि इसका समन्वयन डॉ. राजा पाठक, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई, डॉ. दीप्ति गुप्ता, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई, एवं डॉ. अरुण कुमार मिश्रा, विभावि, हजारीबाग द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम के निदेशक प्रो. मिथिलेश कुमार सिंह पूरे कार्यक्रम का प्रतिवेदन पाठ किया। इस आयोजन की देखरेख स्थानीय नेतृत्व टीम द्वारा की गई, जिसमें जिला समन्वयक व गिरिडीह कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मृगेंद्र नारायण सिंह सहित आयोजन, स्वागत, पंजीकरण,आवासन, साज-सज्जा, अल्पाहार तथा प्रेस एवं रिपोर्टिंग समितियों के सदस्यों ने शानदार आपसी तालमेल और समन्वित प्रयासों से कार्यक्रम को सफल बनाया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. बलभद्र सिंह ने किया। विशेष रूप से डॉ. बी. सिंह, डॉ. जी. समदानी, श्री बी.एस. त्रिपाठी, डॉ. पी.एम. पाठक, सुश्री श्वेता कुमारी, तथा श्रीमती सुशीला चन्द्रा, श्री आदित्य बेसरा,सहित सभी शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक सदस्यों के सक्रिय सहयोग और सहभागिता रही।









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