
वाराणसी। अखिल भारतीय सनातन न्यास की ओर से माँ बागेश्वरी देवी प्रांगण मे चल रहे नौदिवसीय श्री रामकथा के आज आठवें दिन महंत बालक देवाचार्य जी महाराज ने भरत चरित्र प्रसंग का अत्यंत मार्मिक एवं प्रेरणादायी वर्णन करते हुए कहा कि भरत भारतीय संस्कृति में त्याग, समर्पण, भ्रातृप्रेम, धर्मनिष्ठा एवं आदर्श शासन के सर्वोच्च प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि भरत का चरित्र हमें सिखाता है कि सत्ता और वैभव से बढ़कर मर्यादा, कर्तव्य और पारिवारिक प्रेम होता है।
बालक देवाचार्य ने कहा कि जब भरत को भगवान श्रीराम के वनवास और महाराज दशरथ के निधन का समाचार मिला , तब उन्होंने अपनी माता कैकेयी के अनुचित वरदानों का कठोर विरोध किया तथा स्वयं को इस घटना के लिए उत्तरदायी मानते हुए गहरा दुःख व्यक्त किया।
उन्होंने अयोध्या का राज सिंहासन स्वीकार करने से इंकार कर चित्रकूट जाकर प्रभु श्रीराम से लौटकर राजगद्दी संभालने का आग्रह किया।
कथा के दौरान भरत-मिलाप प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन सुनकर उपस्थित श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गईं। कथा व्यास ने कहा कि भरत ने श्रीराम की चरण पादुकाओं को अयोध्या के सिंहासन पर स्थापित कर स्वयं एक सेवक के रूप में नंदीग्राम में रहकर राज्य का संचालन किया। ऐसा त्याग, निष्ठा और समर्पण विश्व इतिहास में दुर्लभ है।
उन्होंने कहा कि आज के सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन में भरत के आदर्शों की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। यदि व्यक्ति भरत के चरित्र से प्रेरणा लेकर अपने कर्तव्यों का पालन करे, तो परिवार, समाज और राष्ट्र में सुख, शांति एवं सद्भाव का वातावरण स्थापित हो सकता है।
कथा के उपरांत श्रद्धालुओं ने श्रीराम नाम संकीर्तन एवं आरती में सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, गणमान्य नागरिक एवं धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।
इस मौके पर आयुष मंत्री डॉ दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ की भी गरिमामयी उपस्थिति रही और उन्होंने व्यास पीठ की आरती उतारी।
मंच का संचालन प्रधान सचिव राजेश सेठ ने किया।
इस मौके पर कथा की समाप्ति पर व्यास पीठ की आरती उतारने वालों में मुख्य रूप से डॉ अजय जायसवाल, रविशंकर सिंह, जयशंकर गुप्ता, प्रमोद यादव मुन्ना, वतन कुशवाहा, किशोर सेठ, विजय कुमार, राजेश गुप्ता, मुन्नू लाल, संजय महाराज, मंगल सेठ, रवि झुनझुनवाला, श्री प्रकाश, विपुल गुप्ता, विष्णु गुप्ता, डॉक्टर पुष्पा जायसवाल, रोशनी जी, अनामिका जी रहे।









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