शहर में जल निकासी व्यवस्था होगी सुदृढ़, करसड़ा प्लांट व बाहरी जोनों में भी सुधार
वाराणसी।नगर निगम शहर की बुनियादी सुविधाओं को और सुदृढ़ करने में जुटा हुआ है। इस क्रम में 3.26 करोड़ रुपये की लागत से शहर की 62 सड़कों, गलियों और बुनियादी परियोजनाओं के निर्माण व मरम्मत के लिए टेंडर की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
इस महा-योजना के तहत शहर के 15 वार्डों की गलियों की मरम्मत, इंटरलॉकिंग, चौका लगाने और जल निकासी (ड्रेनेज) व्यवस्था को दुरुस्त करने का कार्य प्रस्तावित है।
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि क्षतिग्रस्त रास्तों और जलभराव की समस्या से स्थाई मुक्ति दिलाने के लिए इन महत्वपूर्ण विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है।
ऐसे में शहर के विभिन्न वार्डों की अंदरूनी गलियों के जल्द कायाकल्प होने की उम्मीद है।
इसमें भेलूपुर जोन के 12 वार्डों (वार्ड संख्या 22, 23, 25, 26, 28, 36, 47, 50, 51, 54, 56 और 57) के साथ-साथ गोला दीनानाथ (वार्ड 84), कमालपुरा (वार्ड 100), राजघाट (वार्ड 15) और करसड़ा प्लांट क्षेत्र भी शामिल हैं। इन सभी 15 वार्डों व क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सड़कों व गलियों का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।
जिसके तहत भेलूपुर, सीरगोवर्धन पुर, अशोकपुरम, सुंदरपुर, भगवानपुर, मदनपुरा, बिरदोपुर, छोटी पियरी (गोला दीनानाथ) और कमलगड़हा (कमालपुरा) जैसे घने इलाकों की अंदरूनी गलियों में इंटरलॉकिंग टाइल्स, सीसी रोड का निर्माण और चौका रिसेटिंग का कार्य शामिल है। इसके साथ ही इन क्षेत्रों में जलभराव की समस्या से स्थाई रूप से निपटने के लिए नेवादा (भिखारीपुर तिराहा से एपेक्स हॉस्पिटल तक), सुन्दरपुर, छित्तुपुर खास और खुशहाल नगर में करोड़ों की लागत से भूमिगत जल निकासी (ड्रेनेज) पाइपलाइन बिछाने का काम भी होगा। इसके अलावा जन- सुविधाओं और क्षेत्रीय सौंदर्यीकरण को बढ़ावा देने के लिए साकेत नगर में शीतला माता मंदिर के पास दो भव्य हॉल व विश्राम स्थल, सीरगोवर्धनपुर में अत्याधुनिक व्यायामशाला, कमालपुरा मैदान के पास चारकुंआ की मरम्मत तथा नेवादा व बिरदोपुर में क्रमशः सरदार वल्लभ भाई पटेल व बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की मूर्तियों के आसपास बाउंड्रीवॉल, छतरी व रेलिंग निर्माण जैसे जनहित के कार्य भी इसी स्वीकृत धनराशि से सुनिश्चित किए जाएंगे।
नगर आयुक्त ने बताया कि सभी निर्माण कार्यों के अनुरक्षण और रख-रखाव की जिम्मेदारी तीन वर्ष तक संबंधित कार्यदायी फर्म या ठेकेदार की होगी।
इस नियम के तहत कार्य पूर्ण होने के तीन वर्ष बाद ही जमानत (परफॉर्मेंस सिक्योरिटी) की धनराशि वापस की जाएगी। कार्यों की पारदर्शिता के लिए काम शुरू होने के पूर्व, कार्य के दौरान तथा समाप्ति के बाद अनिवार्य रूप से जियो टैगिंग (फोटोग्राफ) कराई जाएगी। इसके साथ ही संबंधित कार्यदायी फर्म या ठेकेदार को निर्माण सामग्री की जांच आईआईटी बीएचयू, राजकीय प्रयोगशाला या एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब से करानी होगी और जांच रिपोर्ट के बाद ही भुगतान की कार्रवाई की जाएगी। अनुबंध गठन के दौरान या उसके बाद यदि किसी ठेकेदार के दस्तावेज कूटरचित (फर्जी) पाए जाते हैं, तो उसका अनुबंध तुरंत निरस्त कर फर्म को काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डाल दिया जाएगा।








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