
रिपोर्ट उपेंद्र कुमार पांडेय
आजमगढ़।भगवान शिव का प्रिय सावन मास इस वर्ष 29-7-2026 को रात्रि 7.26 पर प्रतिपदा लगेगी और श्रावण कृष्ण पक्ष 30-7-2026 प्रतिपदा रात्रि 8.34 तक है, इस वर्ष सावन की शुरुआत दिन गुरूवार से श्रवण नक्षत्र 6 बजकर 1 मिनट सायं आयुष्मान योग 1:11 रात्रि तक वालव करण उपरांत कौलव करण शुरू होकर 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन के साथ संपन्न होगा।
इस बार सावन की शुरुआत कई शुभ संयोगों में हो रही है , 30 जुलाई को श्रवण नक्षत्र, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग का दुर्लभ संयोग रहेगा।
यह शिव आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। विधि विधान से देवाधिदेव की पूजा-अर्चना विशेष फलदायक मानी जाती है।श्रावण हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह से प्रारंभ होने वाले वर्ष का पाँचवा मास है। भारत में इस माह में वर्षा ऋतु होती है और प्रायः बहुत अधिक गर्मी होती है। श्रावण मास, जिसे सावन का महीना भी कहा जाता है, भगवान शिव की पूजा करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए मनाया जाता है। सावन माह के दौरान सोमवार का दिन शुभ होता है और ऐसा माना जाता है कि यदि भक्त समर्पण के साथ भगवान शिव की पूजा करे तो भगवान शिव उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।[1]
श्रावण मास शिवजी को विशेष प्रिय है। भोलेनाथ ने स्वयं कहा है—
द्वादशस्वपि मासेषु श्रावणो मेऽतिवल्लभः ।
श्रवणार्हं यन्माहात्म्यं तेनासौ श्रवणो मत: ॥
श्रवणर्क्षं पौर्णमास्यां ततोऽपि श्रावण: स्मृतः।
यस्य श्रवणमात्रेण सिद्धिद: श्रावणोऽप्यतः ॥[2]
अर्थात मासों में श्रावण मुझे अत्यंत प्रिय है। इसका माहात्म्य सुनने योग्य है अतः इसे श्रावण कहा जाता है। इस मास में श्रवण नक्षत्र युक्त पूर्णिमा होती है इस कारण भी इसे श्रावण कहा जाता है। इसके माहात्म्य के श्रवण मात्र से यह सिद्धि प्रदान करने वाला है, इसलिए भी यह श्रावण संज्ञा वाला है।पार्थिव शिवलिंग का पूजन कलयुग में सर्वश्रेष्ठ एवं सिद्धिप्रद बताया गया है।इसका स्वरूप विकृत न कर बढ़िया ढंग से बनाएं।आंख नाक मूंछ आदि बनाने की आवश्यकता नहीं है।शिव लिंग में समस्त देवताओं का वास होता है, अतः सबकुछ छोड़कर शिव लिंग की पूजा सर्वश्रेष्ठ है।( लिंग पुराण)
ज्योतिष आचार्य भूपेंद्रानन्द गुरु जी (महाराज )












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