प्रेमचंद केवल कथाकार नहीं, समाज के सजग विश्लेषक भी थे :- डॉ. राम सुधार सिंह

लमही में ‘सुनो मैं प्रेमचंद’ कार्यक्रम के 1980वें दिवस पर ‘खुचड़’ कहानी का हुआ पाठ

 

वाराणसी। प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र लमही की ओर से रविवार को आयोजित ‘सुनो मैं प्रेमचंद’ कार्यक्रम के 1980वें दिवस पर साहित्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद की चर्चित कहानी ‘खुचड़’ का पाठ वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. रजनी अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम में साहित्यकारों ने प्रेमचंद के साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में डॉ. रजनी अग्रवाल को संरक्षक वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राम सुधार सिंह, निदेशक राजीव गोंड ने सम्मानित किया। कहानी की समीक्षा करते हुए डॉ. राम सुधार सिंह ने कहा कि ‘खुचड़’ प्रेमचंद की प्रतिनिधि कहानियों में से एक है, जो सामान्य जीवन की छोटी-सी घटना के माध्यम से समाज की गहरी सच्चाइयों, मानवीय मनोविज्ञान और नैतिक मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से उजागर करती है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद केवल एक महान कथाकार ही नहीं, बल्कि समाज के सजग विश्लेषक और मानवीय मूल्यों के सशक्त पक्षधर भी थे। उनकी रचनाएं आज भी समाज को दिशा देने और आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती हैं। शुभारंभ मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इस अवसर पर राजेश श्रीवास्तव, विपनेश सिंह, वीणा सहाय, नमन श्रीवास्तव, अतुल यादव, राहुल यादव, रोहित गुप्ता, समीक्षा त्रिपाठी, डॉ. मनोहर लाल, मनोज श्रीवास्तव सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन राहुल यादव, स्वागत, रोहित गुप्ता और धन्यवाद ज्ञापन संजय श्रीवास्तव ने धन्यवाद किया।

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