प्रशासन की हठधर्मिता के खिलाफ ऑटो चालकों ने खोला मोर्चा, मांगें पूरी न होने पर चक्का जाम की चेतावनी

रिपोर्ट:- उपेंद्र कुमार पांडेय 

 

आजमगढ़। आटो रिक्सा चालक समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले चालकों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर संगठन ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कृपाशंकर पाठक के नेतृत्व में चालकों ने जिलाधिकारी से वार्ता के बाद मांग पत्र सौंपकर प्रशासन को चेताया है कि यदि चालकों की जायज मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो संगठन किसी भी समय उग्र आंदोलन, धरना प्रदर्शन और चक्का जाम करने को बाध्य होगा।

प्रदेश अध्यक्ष कृपाशंकर पाठक ने आरोप लगाया कि केंद्रीय परिवहन नियमों का उल्लंघन कर चालकों का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय परिवहन विभाग के नियमानुसार डीजल ऑटो रिक्शा का परमिट 15 साल के लिए होना चाहिए और वन टाइम टैक्स के नाम पर पूरे 15 वर्ष का शुल्क भी वसूला गया, लेकिन प्रदूषण के नाम पर वर्ष 2010 से परमिट को केवल 10 साल का कर दिया गया। प्रशासन की इस हठधर्मिता के कारण तमाम ऑटो चालक आज भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।

संगठन ने मांग की है कि जिन चालकों को पूरे 15 साल का परमिट उपयोग नहीं करने दिया गया, उन्हें प्रशासन ब्याज सहित उचित मुआवजा दे। साथ ही, परमिट प्रतिबंधित होने के बावजूद कुछ चुनिंदा गाड़ियों के परमिट कैसे बनाए गए, इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। कहा कि आर.टी.ओ. द्वारा आजमगढ़ में 48 केंद्रों से परमिट तो जारी कर दिए गए हैं, लेकिन एक भी स्थान पर अधिकृत ऑटो स्टैंड विकसित नहीं किया गया है। इसके कारण शहर और ग्रामीण इलाकों में चालकों को गाड़ी खड़ी करने तथा सवारी उतारने-चढ़ाने में भारी कठिनाई होती है और वे आए दिन पुलिस के चालान का शिकार बनते हैं। नरौली रेलवे स्टेशन समेत कई प्रमुख मार्गों पर अतिक्रमण के कारण यातायात वैसे ही दुष्कर है, ऐसे में प्रशासन को ऑटो और ई-रिक्शा के लिए मार्ग निर्धारण सुनिश्चित करना चाहिए।

ऐसे में संगठन की मांग है कि सभी पुरानी डीजल ऑटो गाड़ियों को नियमानुसार 15 वर्ष का पूरा परमिट दिया जाए और आर.टी.ओ के प्रतिबंधात्मक फैसलों पर पुनर्विचार हो। 15 साल की अवधि से कम समय में परमिट रोकने पर वाहन स्वामियों को 5 से 10 साल की अवधि का ब्याज सहित उचित मुआवजा मिले। ऑटो रिक्शा का जीवनकाल (15 वर्ष) समाप्त होने के बाद किसी भी प्रकार का टैक्स न वसूला जाए और न ही कबाड़ हो चुकी गाड़ियों पर टैक्स का दबाव बनाया जाए। आर.टी.ओ. द्वारा चिन्हित सभी 48 केंद्रों पर स्थाई व अस्थाई स्टैंड विकसित किए जाएं और ई-रिक्शा व ऑटो के लिए रूट तय किए जाएं। ठेका परमिट के नवीनीकरण में किसी अपरिहार्य कारण से देरी होने पर लगने वाला 200 रुपये प्रतिमाह का विलम्ब शुल्क तत्काल बंद हो। रोके गए फिटनेस परीक्षण कार्य को तुरंत चालू किया जाए और सभी ऑटो व ई-रिक्शा चालकों के लिए लाइसेंस अनिवार्य कर इसकी नियमित जांच हो।

कृपा शंकर पाठक ने कहा कि प्रशासनिक विसंगतियों के कारण आज ऑटो चालक और उनका परिवार पूरी तरह परेशान है। जब टैक्स 15 साल का लिया गया तो परमिट 10 साल का क्यों? यदि प्रशासन ने हमारी इन 8 सूत्रीय मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो चक्का जाम की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस दौरान छोटेलाल, शाहिद अहमद, राम अवतार, कैलाश यादव, हलधर दुबे, वीरेंद्र यादव, मुकेश, सनी गुप्ता, संरक्षक प्रभु नारायण प्रेमी, श्रवण कुमार यादव, नागेंद्र मौर्य, शिवप्रसाद, रियाज, शेर बहादुर, फिरोज, रमेश, कमला, रामबदन, महेंद्र, हरगुन, राजन मौर्य, करमखान, रामा गौड, सुरेश यादव, श्याम नारायण, गोवर्धन, राजेंद्र यादव, अरविंद कुमार, महेंद्र राम, अनिल सिंह, सुरेंद्र राम, गोपी बाबा आदि मौजूद रहे।

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