भक्ति कवयित्रियाँ साहस के साथ पितृसत्ता का प्रतिरोध रचती हैं :- सुभाष राय

शुकदेव सिंह स्मृति सम्मान से सम्मानित हुए सुभाष राय सुभाष राय महिला अध्ययन और विकास केंद्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय एवं

कबीर विवेक परिवार द्वारा दिनांक 24 जुलाई को आयोजित विशेष व्याख्यान में

बोल रहे थे। यह “अंडाल और अक्का महादेवी: भक्ति का लोकवृत्त और स्त्रीजीवन” विषय पर आयोजित किया गया । कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों द्वारा

महामना पंडित मदन मोहन मालवीय और शुकदेव सिंह की छवि पर पुष्पांजलि, दीपप्रज्वलन और कुलगीत गायन से हुआ । कार्यक्रम का स्वागत वक्तव्य महिला

अध्ययन एवं विकास केंद्र की डॉ. मीनाक्षी झा ने प्रेषित किया और कबीरविवेक परिवार का परिचय और विषय की रूपरेखा हिंदी विभाग के प्रो.मनोज

कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया ।

महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र के समन्वयक प्रो. आशीष त्रिपाठी ने मुख्यअतिथि श्री सुभाष राय की दो प्रमुख पुस्तकों पर चर्चा करते हुए बताया कि

पितृसत्ता और स्त्री रचना को देखने का नजरिया श्री सुभाष राय जी की पुस्तकों का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं । उन्होंने बताया कि इस सम्मान

के लिए निर्णायक मण्डल में प्रो. काशीनाथ सिंह और श्री अशोक वाजपेयी नेअध्यक्षीय वक्तव्य अवधेश प्रधान ने कहा भक्ति साहित्य की परंपरा को बनाए

रखा और एकता को बनाए रखा । भक्ति साहित्य के अध्ययन से हमे पता चलता है

कि सांस्कृतिक एकता का निर्माण कविता के माध्यम से हुआ ।

कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रज्ञा पारमिता ने दिया । कार्यक्रम का

संचालन हिंदी विभाग की डॉ. किंगसन पटेल ने किया । इस दौरान सभागार में

श्री बोधिसत्व, मुंबई ; आभा बोधिसत्व, मुंबई, डॉ सूर्यनारायण, प्रयागराज;

श्रीमती भगवती सिंह, प्रो. सदानंद शाही, प्रो. वशिष्ठ अनूप, प्रो.

श्रद्धा सिंह, डॉ शशिकला त्रिपाठी, डॉ प्रकाश उदय, डॉ मुक्ता, डॉ शशिकला

पांडे, प्रो के एम पांडे, प्रो सुमन जैन, डॉ घनश्याम, प्रो नीरज खरे, प्रो प्रभाकर सिंह,

प्रो. अर्चना शर्मा, प्रो अर्पिता चटर्जी, प्रो विवेक सिंह, डॉ प्रभात

मिश्र, डॉ प्रियंका सोनकर, प्रो. रविशंकर सोनकर, डॉ सत्य प्रकाश सिंह,

डॉ प्रीति त्रिपाठी, डॉ सत्य प्रकाश पाल के साथ शोधार्थी और सैकड़ों छात्र उपस्थित रहे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *