
वाराणसी।उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा समाचार पत्रों में गौ-संरक्षण, संवर्धन और सेवा के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाकर जारी किए गए भारी-भरकम विज्ञापनों को परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज द्वारा स्थापित ‘गो-संसद्’ ने पूरी तरह भ्रामक, तथ्यहीन और छलावा करार दिया है। गो-संसद् ने सरकार के ‘नीति, नीयत और नतीजे’ के दावों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह जमीनी हकीकत से मुंह मोड़ने और केवल शहरी आबादी को भ्रमित करने का असफल प्रयास है। उक्त बातें रविवार को श्रीविद्या मठ में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहीं।
पूज्य ज्योतिर्मठ शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा पूर्व में उठाए गए गंभीर प्रश्नों का संदर्भ देते हुए कहा गया कि गोरक्षपीठ का महंत प्रदेश का मुख्यमंत्री हो, इसके बावजूद राज्य में गौ-वंश की दशा अत्यंत करुण और चिंतनीय बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि सरकार से मेरा सीधे 6 तीखे सवाल और आलोचनात्मक बिंदु हैं
1.निजी गौशाला की फोटो और नस्ल का भ्रम: उत्तर प्रदेश के सरकारी गौ-संरक्षण का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार के पास विज्ञापन में दिखाने के लिए कोई आदर्श सरकारी गौशाला तक नहीं है; उन्हें अपनी निजी गौशाला की तस्वीर लगानी पड़ रही है। उत्तर प्रदेश की पहचान ‘गंगातीरी’ नस्ल को दरकिनार कर गुजरात की ‘गीर’ गाय की फोटो छापना शासन और अधिकारियों की घोर अनभिज्ञता का प्रमाण है।
2.गौशाला बनाम यातना गृह (क्रॉस-ब्रीडिंग का खतरा): 7500 से अधिक गौ-आश्रय स्थलों का दावा जमीनी स्तर पर सफेद झूठ है। आपातकालीन आश्रय स्थलों में देशी गायों के साथ जर्सी सांडों को रखा जा रहा है, जिससे नस्ल सुधार के बजाय वर्णसंकरण (cross-breeding) का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। गौ-वंश भूख और प्यास से तड़प-तड़पकर मरने को विवश है।
3.कागजी योजनाएं और ग्रीन एनर्जी का ढोंग: ‘नंदनी कृषक समृद्धि योजना’ और ‘नंद बाबा योजना’ धरातल पर शून्य हैं। गोबर से ग्रीन एनर्जी और गौ-उत्पाद आधारित उद्योगों के दावे केवल विज्ञापनों तक सीमित हैं। प्रदेश के किसी भी जिले में ऐसा कोई सुव्यवस्थित उद्योग या पावर प्लांट दिखाई नहीं देता।
4.आंकड़ों की बाजीगरी: 12 लाख से अधिक गौ-वंश के संरक्षित होने का आंकड़ा पूरी तरह भ्रामक है। यदि जन-भागीदारी और सरकारी अभियान इतने ही सफल होते, तो आज पूज्य गौ-माता सड़कों और खेतों में दर-दर भटकने और दुर्घटनाओं का शिकार होने को मजबूर न होतीं।
5.दुग्ध उत्पादन के आंकड़ों में छल: दुग्ध उत्पादन में प्रदेश को नंबर वन बताने वाली सरकार यह स्पष्ट करे कि इस आंकड़े में हमारी देशी गौ-माता का योगदान कितना है और भैंस तथा जर्सी गाय का कितना?
6.मूल प्रश्न पर मौन क्यों? गाय पशु है या माता?: सरकार के विज्ञापनों में इस मूल प्रश्न का कोई उत्तर नहीं है कि राज्य सरकार गाय को केवल एक ‘पशु’ मानती है या ‘माता’? गो-माता को पशु श्रेणी में रखकर उनके संरक्षण का स्वांग रचा जा रहा है जबकि ऐसा करना गोमाता का अपमान है।
उन्होंने ने कहा कि सनातन संस्कृति में महाराज दिलीप, महर्षि वशिष्ठ, प्रभु श्री राम और भगवान श्री कृष्ण की पावन परंपरा गौ-सेवा और गौ-रक्षा पर ही आधारित रही है। किंतु वर्तमान सत्ता में शिक्षा और जनमानस से गाय के वास्तविक आध्यात्मिक व सामाजिक महत्व को काटकर दूर कर दिया गया है।
प्रखर गोसेवाधीश पं. देवेन्द्र पाण्डेय ‘गोपजी’ ने घोषणा की है कि उत्तर प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में स्थित सरकारी गौशालाओं की दुर्दशा और सरकार की कुनीतियों का सच उजागर करने के लिए जमीनी स्तर पर वीडियो बनाकर जनता की अदालत में लाया जाएगा। स्थानीय विधायकों और सांसदों के पास जनता के इन सीधे प्रश्नों का कोई उत्तर नहीं है।
सरकार अपने अहंकार का त्याग करे, पूज्य शंकराचार्यों एवं आचार्यों के परामर्श को स्वीकार करे, गाय को तत्काल प्रभाव से ‘पशु’ की सूची से हटाकर ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दे और विज्ञापनों के माध्यम से जनता में झूठ फैलाना बंद करे।
ज्ञातव्य है कि परमाराध्य पूज्य शंकराचार्य जी महाराज अपनी 81 दिवसीय ‘गविष्ठि यात्रा’ उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों का भ्रमण कर हाल ही में काशी लौटे हैं। इस व्यापक यात्रा के दौरान उन्होंने 14,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की, लगभग 1,500 जनसभाओं को संबोधित किया और करीब 18 लाख लोगों से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित किया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं में एक ‘नोट अभियान’ चलाकर ‘अभिनव आशीर्वाद गोधाम’ की स्थापना की जाएगी।आगामी शारदीय नवरात्रि के अवसर पर काशी की पावन धरा पर ‘विशाल गो-प्रतिष्ठा यज्ञ’ का आयोजन होगा।












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