मन के हारे हार है और मन के जीते जीत

 

 

रिपोर्ट अनुपम भट्टाचार्य 

 

वाराणसी। मन अगर समाज के उत्थान एवं समाज के प्रति सुंदर भावनाओं से ओत प्रोत हो जाये तो फिर मानव का हर प्रकार का विकास चाहे भौतिक हो या आध्यात्मिक संभव है, परन्तु अगर यही मन मोह और माया के साथ ग्रसित हो जाए तो फिर मानव का हर तरह से पतन का कारण बन जाता है, इसीलिए मन पर काबू पाना जरूरी है।यह तभी हो सकता है जब मन सतगुरु और निरंकार परमात्मा से सदैव जुड़ा रहे, तभी मन पर सही मायने में जीत होगी और हर एक मानव सुखी होगा।

उक्त उद्गार मलदहिया सत्संग भवन पर विशाल इंग्लिश मीडियम समागम को संबोधित करते हुए चंडीगढ़ से पधारे आदरणीय मोहित गुप्ता जी ने व्यक्त किया। उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य का उदाहरण देते हुए बताया कि जब तक उनके मन में राज्य के प्रति समर्पण का ध्यान था तब तक सुंदर तरीके से युद्ध करते रहे, लेकिन ज्योंही मन में पुत्र मोह समाया तो युद्ध हार गए। इसी तरह मानव आज सांसारिक रिश्तों और संसारिक सुखों की चाहत में तमाम कुकृत्य करता जा रहा है जिसका परिणाम आज हर ओर देखने को मिल रहा है ।

श्री मोहित जी ने आगे बताया की धर्मशास्त्रों में मानव जीवन को श्रेष्ठ बताया गया है क्योंकि मानव ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जिसके अंदर विवेक होता है । यही विवेक मानव को श्रेष्ठ बनाती है।यह विवेक भौतिक ज्ञान से नहीं, अपितु सत्संग से प्राप्त होता है।आज सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज हर एक मानव को निरंकार ब्रह्म का ज्ञान देकर सेवा, सुमरण, सत्संग करने की प्रेरणा देते हुए सभी से प्यार और सद्भाव का व्यवहार करना सीखा रही है।लाखों प्राणी इस ज्ञान से जुड़कर सुख का अनुभव कर रहे हैं ।

समागम में वाराणसी के अलावा गाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र आदि जिलों से आए भक्तों ने इंग्लिश भाषा का सहारा लेते हुए गीतों, विचारों, कविताओं और नाटक के द्वारा गुरु का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया। आई हुई समस्त संगतों का एवं अतिथियों का आभार वाराणसी जोन के जोनल इंचार्ज श्री सिद्धार्थ शंकर सिंह जी ने व्यक्त करते हुए सभी जन मानस के लिए सुख की कामना किया।

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