
विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 11,958 उपाधियां एवं प्रमाण-पत्र, 51 स्वर्ण पदक होंगे प्रदान
महामहिम राज्यपाल चार विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के एक एवं तीन उत्कृष्ट अध्यापकों को करेंगी सम्मानित
वाराणसी। भारतीय ज्ञान परम्परा, संस्कृत संस्कृति और शैक्षिक उत्कृष्टता के गौरवशाली समन्वय का साक्षी बनने जा रहा सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी का 44 वां दीक्षान्त महोत्सव आगामी 29 जुलाई 2026 को प्रातः 9:00 बजे विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक मुख्य भवन में भव्य एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित होगा। समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल करेंगी।
समारोह के मुख्य अतिथि भारत के प्रख्यात वैज्ञानिक, शिक्षाविद् तथा पद्मश्री सम्मान से अलंकृत प्रो. आशुतोष शर्मा होंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेन्द्र उपाध्याय तथा उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी समारोह की गरिमा बढ़ाएँगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा विश्वविद्यालय की वार्षिक प्रगति एवं उपलब्धियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे तथा कुलसचिव श्री राकेश कुमार समारोह की औपचारिक कार्यवाही सम्पन्न कराएँगे।
वर्ष 1791 में स्थापित संस्कृत महाविद्यालय से प्रारम्भ हुई इस संस्थान की गौरवपूर्ण यात्रा वर्ष 1958 में वाराणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय तथा 1973 में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुई। लगभग ढाई शताब्दी की गौरवमयी विरासत को संजोए यह विश्वविद्यालय आज उत्तर प्रदेश सहित दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखण्ड एवं उत्तराखण्ड सहित देश के अनेक राज्यों के विद्यार्थियों को संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परम्परा की उच्च शिक्षा प्रदान कर रहा है।
44वें दीक्षान्त महोत्सव में वर्ष 2026 की परीक्षाओं में सफल 11,958 विद्यार्थियों को विभिन्न उपाधियाँ एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। इनमें प्रथम, पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा, शास्त्री, आचार्य, शिक्षाशास्त्री, संस्कृत प्रमाणपत्रीय, आयुर्वेदाचार्य तथा विद्यावारिधि की उपाधियाँ सम्मिलित हैं।
समारोह में विभिन्न परीक्षाओं में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले 29 मेधावी छात्र-छात्राओं को 51 स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया जाएगा। इनमें 17 छात्रों को 35 पदक तथा 12 छात्राओं को 16 पदक प्रदान किए जाएंगे। उपाधियाँ एवं प्रमाण-पत्र डीजी लॉकर के माध्यम से भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
दीक्षान्त महोत्सव का एक विशेष आकर्षण यह होगा कि महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल द्वारा चार विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के क्रमशः एक एवं तीन उत्कृष्ट अध्यापकों को उनके उल्लेखनीय शैक्षणिक, शोध एवं अकादमिक योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, नवाचार, अनुसंधान और उत्कृष्ट अध्यापन को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
समारोह के मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. आशुतोष शर्मा देश के अग्रणी वैज्ञानिकों एवं शिक्षाविदों में अग्रणी स्थान रखते हैं। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर से रासायनिक अभियांत्रिकी में अध्ययन किया तथा अमेरिका के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शोध कार्य किया। वे आईआईटी कानपुर में प्राध्यापक रहे, भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सचिव के रूप में विज्ञान, अनुसंधान एवं नवाचार को नई दिशा दी तथा वर्तमान में आईआईटी कानपुर के इंस्टीट्यूट चेयर प्रोफेसर एवं भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (INSA) के अध्यक्ष हैं। उन्हें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार, इन्फोसिस पुरस्कार, यूरेका पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। वर्ष 2025 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
समारोह में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर आधारित लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही भारतीय सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत करते हुए लोकगीत, लोकनृत्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुतियाँ होंगी, जो दीक्षान्त महोत्सव को और अधिक भव्य एवं अविस्मरणीय बनाएँगी।
इस वर्ष के 44 वें दीक्षान्त महोत्सव की थीम “संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परम्परा : विकसित भारत–2047 का वैचारिक आधारशिला” निर्धारित की गई है। यह थीम भारतीय ज्ञान-विज्ञान, सांस्कृतिक मूल्यों एवं संस्कृत की शाश्वत परम्परा को आधुनिक भारत के विकास से जोड़ने का सशक्त संदेश देती है। विश्वविद्यालय का विश्वास है कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर, ज्ञान-आधारित, समृद्ध एवं विकसित भारत-2047 के निर्माण की सुदृढ़ आधारशिला है।
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय का 44 वाँ दीक्षान्त महोत्सव भारतीय ज्ञान परम्परा, संस्कृत संस्कृति, अकादमिक उत्कृष्टता, शोध, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का भव्य उत्सव होगा। महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. आशुतोष शर्मा, उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेन्द्र उपाध्याय, राज्य मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी, कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा तथा कुलसचिव श्री राकेश कुमार की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित यह समारोह विश्वविद्यालय के इतिहास में एक नई उपलब्धि के रूप में स्मरणीय बनेगा।
उक्त अवसर पर कुलसचिव राकेश कुमार, परीक्षा नियंत्रक दिनेश कुमार,प्रो हीरक कान्ति चक्रवर्ती, डॉ विशाखा शुक्ला,डॉ रविशंकर पाण्डेय, एवं जनसम्पर्क अधिकारी शशीन्द्र मिश्र आदि उपस्थित थे।












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