महामहिम कुलाधिपति ने किया पुरातत्व संग्रहालय एवं शताब्दी भवन के जीर्णोद्धार का लोकार्पण

दुर्लभ पाण्डुलिपियों, पुरातात्विक धरोहरों एवं निर्माणाधीन विकास कार्यों का किया सूक्ष्म निरीक्षण

 

वाराणसी।सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के 44 वें दीक्षान्त समारोह के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने साढ़े चार करोड़ के बजट से निर्मित विश्वविद्यालय के लाल भवन तथा वहां स्थित पुरातत्व संग्रहालय के जीर्णोद्धार एवं आधुनिकीकरण तथा शताब्दी भवन अतिथि गृह के नवीनीकरण का लोकार्पण किया।

महामहिम कुलाधिपति ने वर्ष 1917 में अंग्रेजों द्वारा निर्मित ऐतिहासिक लाल भवन तथा 15 नवम्बर 1998 को लोकार्पित शताब्दी भवन अतिथि गृह के जीर्णोद्धार के उपरान्त उनका उद्घाटन किया। जो कि क्रमशः लगभग 4 करोड़ 50 लाख की बजट से निर्मित हुआ है।उन्होंने भवनों के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए किए गए संरक्षण एवं नवीनीकरण कार्यों की प्रशंसा की।

महामहिम कुलाधिपति ने वर्ष 1950 में स्थापित पुरातत्व संग्रहालय का अवलोकन करते हुए वहाँ संरक्षित लगभग 7,000 से अधिक दुर्लभ पुरावस्तुओं, प्राचीन मुद्राओं, मूर्तियों एवं ऐतिहासिक धरोहरों का निरीक्षण किया। संग्रहालय में सुरक्षित कुषाणकालीन मानव मस्तक को देखकर वे अत्यन्त प्रभावित हुईं तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं आधुनिकीकरण के कार्यों की सराहना की।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित यह संग्रहालय शोधार्थियों, विद्यार्थियों और देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण एवं अध्ययन का महत्वपूर्ण केन्द्र बनेगा।

इसके उपरान्त महामहिम ने सरस्वती भवन पुस्तकालय में ज्ञान भारतम् (राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन) के अंतर्गत संचालित दुर्लभ पाण्डुलिपियों के संरक्षण केन्द्र का सूक्ष्म निरीक्षण किया। उन्होंने सवा लाख से अधिक दुर्लभ पाण्डुलिपियों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण एवं डिजिटलीकरण कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए भारतीय ज्ञान-परम्परा के संरक्षण को समय की आवश्यकता बताया।

महामहिम कुलाधिपति ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सीएसआर फण्ड से निर्माणाधीन श्रमण विद्या संकाय के जीर्णोद्धार एवं आधुनिकीकरण कार्यों का भी सूक्ष्मता से अवलोकन किया। निर्माण कार्य की गुणवत्ता और आधुनिक स्वरूप को देखकर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की तथा इसे विश्वविद्यालय की अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की महत्वपूर्ण पहल बताया। साथ ही उन्होंने दलाई लामा भवन सहित परिसर में संचालित विकास एवं संरक्षण कार्यों की भी सराहना की।

महामहिम ने कहा कि सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के साथ आधुनिक अधोसंरचना के विकास का अनुकरणीय कार्य कर रहा है। यह प्रयास भारतीय ज्ञान-परम्परा को सुरक्षित रखते हुए भावी पीढ़ियों तक उसके प्रभावी संवहन तथा विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

स्थापित पुरातत्व संग्रहालय का अवलोकन करते हुए वहाँ संरक्षित लगभग 7,000 से अधिक दुर्लभ पुरावस्तुओं, प्राचीन मुद्राओं, मूर्तियों एवं ऐतिहासिक धरोहरों का निरीक्षण किया। संग्रहालय में सुरक्षित कुषाणकालीन मानव मस्तक को देखकर वे अत्यन्त प्रभावित हुईं तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं आधुनिकीकरण के कार्यों की सराहना की।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित यह संग्रहालय शोधार्थियों, विद्यार्थियों और देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण एवं अध्ययन का महत्वपूर्ण केन्द्र बनेगा।

इसके उपरान्त महामहिम ने सरस्वती भवन पुस्तकालय में ज्ञान भारतम् (राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन) के अंतर्गत संचालित दुर्लभ पाण्डुलिपियों के संरक्षण केन्द्र का सूक्ष्म निरीक्षण किया। उन्होंने सवा लाख से अधिक दुर्लभ पाण्डुलिपियों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण एवं डिजिटलीकरण कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए भारतीय ज्ञान-परम्परा के संरक्षण को समय की आवश्यकता बताया।

महामहिम ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सीएसआर फण्ड से निर्माणाधीन श्रमण विद्या संकाय के जीर्णोद्धार एवं आधुनिकीकरण कार्यों का भी सूक्ष्मता से अवलोकन किया। निर्माण कार्य की गुणवत्ता और आधुनिक स्वरूप को देखकर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की तथा इसे विश्वविद्यालय की अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की महत्वपूर्ण पहल बताया। साथ ही उन्होंने दलाई लामा भवन सहित परिसर में संचालित विकास एवं संरक्षण कार्यों की भी सराहना की।

महामहिम ने कहा कि प्राच्य विद्या का यह विश्वविद्यालय अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के साथ आधुनिक अधोसंरचना के विकास का अनुकरणीय कार्य कर रहा है। यह प्रयास भारतीय ज्ञान-परम्परा को सुरक्षित रखते हुए भावी पीढ़ियों तक उसके प्रभावी संवहन तथा विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उक्त अवसर पर उद्घाटन एवं निरीक्षण के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेन्द्र उपाध्याय, कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा, कुलसचिव राकेश कुमार,प्रो जितेन्द्र कुमार,प्रो राजनाथ,प्रो दिनेश कुमार गर्ग, डॉ विशाखा शुक्ला,अभियंता रामविजय सिंह, डॉ विमल कुमार त्रिपाठी आदि उपस्थित थे।

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