
वाराणसी महानगर के हरसौली,नारायणपुर के स्याही प्रकाशन के उद्गार सभागार में काशी हिन्दी विद्यापीठ एवं सुदामा फाउण्डेशन द्वारा मुंशी प्रेमचंद स्मृति काव्य संगम एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिससे विशिष्ट वक्ताओं ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद जी साहित्यिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक क्षेत्र के दर्पण थे। उनकी लेखनी को हर जन- जन तक बुकलेट बनवाकर निःशुल्क वितरण करने की हम सबको ये आवश्यक है। जिससे समाज में व्याप्त कुरीतियों को काफी हद तक कम किया जा सके। उन्होंने अमीर -गरीब, ऊंच – नीच की भेदभाव पूर्ण दुर्भावनाओं को दूर करने का सदैव प्रयास किया।समय – समय पर उनका विरोध भी हुआ। उसके बाद भी वो अपनी लेखनी के माध्यम से मानव समाज को जागृत करते रहे। ऐसे श्रेष्ठ व्यक्तित्व की 136 वीं जयंती के अवसर पर हम सबको उनकी स्मृतियों को सदैव जागृत रखने की जरूरत है। उक्त विचार मुंशी प्रेमचंद जी के वंशज एवं लमही महोत्सव के संस्थापक डॉ. दुर्गा प्रसाद श्रीवास्तव के अध्यक्षता में डॉ. चंद्रभाल सुकुमार-पूर्व जिला न्यायाधीश एवं अंतर्राष्ट्रीय गजलकार, भारत गौरव डॉ. रामअवतार पांडेय एडवोकेट- प्रमुख अतिथि द्वय एवं अतिविशिष्ट अतिथि श्रीप्रकाश कुमार श्रीवास्तव गणेश, डॉ.शरद श्रीवास्तव, विश्व जनचेतना ट्रस्ट के अध्यक्ष – कवि संतोष कुमार प्रीत ने अपने – अपने संबोधन के दौरान व्यक्त किया।
काशी हिन्दी विद्यापीठ के कुलाधिपति एवं कार्यक्रम के प्रमुख संरक्षक कवि सुखमंगल सिंह “मंगल”, कुलसचिव एवं प्रमुख संयोजक/ संचालक कवि इन्द्रजीत तिवारी निर्भीक, सुदामा फाउण्डेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं स्वागताध्यक्ष डॉ. राजीव गौतम और स्वागत संयोजक पवन कुमार सिंह एडवोकेट ने आगंतुकजनों को अंगवस्त्र, सम्मान पत्र और अंगवस्त्र आदि भेंट करके सम्मानित भी किया।
तत्पश्चात् मुंशी प्रेमचंद स्मृति काव्य संगम में श्रीगणेश वंदना कवि इन्द्रजीत तिवारी निर्भीक एवं संतोष कुमार प्रीत ने किया। कवि सम्मेलन में देवरियां के कवि राममनोहर मिश्र “माहिर विचित्र” ने- प्रेमचंद जयंती पर काव्य और पुष्प चढ़ाने आया हूं, रायबरेली के हास्य कवि अनुज प्रताप सिंह “अनुज”ने -“सबको चाहिए माल खजाना फोकट का, कैसा आया यार जमाना फोकट का”, कवि संतोष कुमार प्रीत ने – “कथा सम्राट को श्रद्धा सुमन अपना समर्पित है”, चंद्रभूषण सिंह ने -“खाली देखात हर जगह लड़ाई बा, कवि सुखमंगल सिंह” मंगल “ने -ना मांग किसी और से उषा की रश्मियां, गणेश लाल मेहता ने – मुंशी प्रेमचंद जी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला, डॉ. बुद्धदेव तिवारी ने – आओ सावन मनभावन, हम-सब गाये मेघ- मल्हार, कवि विनय कुमार गुप्ता – “तन्हा जौनपुरी”ने -” बड़े खुदगर्ज हैं, बेदर्द जमाने वाले”, डॉ. विनोद कुमार वर्मा ने -“ज़िन्दगी की अजब सी कहानी है”, कवि चिंतित बनारसी ने -“गुप्त गूं करते हैं, पक्षी भी आशियाने में, कवि सूर्यदीप कुशवाहा ने”-झूठ ने सच का लिबास पहना है, डॉ.शरद श्रीवास्तव ने -“कहां जा रहे हो,ऐ बदरा सुहाने”, कवि आनन्द कृष्ण “मासूम”ने – “पर्यावरण और जल प्रदूषण से बचाएं रखिए,”कवि इन्द्रजीत तिवारी निर्भीक ने- “मुंशी प्रेमचंद जी सचमुच महान थे, रहते थे वो धरा पर लेकिन सोच के धनी वो आसमान थे,” डॉ. चंद्रभाल सुकुमार ने ” काशी के धनपत राय जी की लेखनी से रहते थे आततायी तंग ऐसे अपने प्यारे लेखक, उपन्यास सम्राट थे अपने प्यारे मुंशी प्रेमचंद, डॉ. राम अवतार पाण्डेय एडवोकेट ने – “प्रेमचंद जईसन अब तक कोई अऊरी ना देखाईल पिया,जेकर लेखनी से भ्रष्टाचार मिट जाई पिया ना”सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। डॉ. मृत्युंजय त्रिपाठी “मलंग”, डॉ. लियाकत अली”जलज”,डॉ.पूनम गुप्ता”पूर्वी “, डॉ. संगीता श्रीवास्तव” शिवपुरी’, ईश्वरचंद पटेल,भजन गायक राकेश चौबे “संगम “ने भी श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।संचालन कवि इन्द्रजीत तिवारी” निर्भीक”, आगंतुक जनों के प्रति धन्यवाद आभार डॉ. राजीव गौतम एवं पवन कुमार सिंह एडवोकेट, भगवती प्रसाद गोड़,धन्यवाद आभार श्रीप्रकाश कुमार श्रीवास्तव “गणेश”एवं कवि सुखमंगल सिंह “मंगल “ने व्यक्त किया।











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