प्रेमचंद जयंती पर लमही में सजा साहित्य और लोकसंस्कृति का उत्सव

वाराणसी। उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती पर प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र (ट्रस्ट), लमही की ओर से आयोजित दो दिवसीय प्रेमचंद उत्सव का शुक्रवार को प्रेमचंद स्मारक स्थल पर साहित्यिक और सांस्कृतिक माहौल के बीच समापन हुआ। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, कलाकारों, पत्रकारों और साहित्य प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शुभ्रा श्रीवास्तव ने मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘पागल हाथी’ का प्रभावशाली पाठ किया। इस दौरान वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्य में मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों और यथार्थवादी दृष्टिकोण पर विस्तार से विचार रखे। इसी अवसर पर प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र की त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका ‘प्रेमचंद पथ’ के जुलाई अंक का विमोचन भी किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यह पत्रिका प्रेमचंद की वैचारिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रही है। सायंकाल आयोजित समारोह में साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले रचनाकारों को ‘प्रेमचंद पथ सम्मान’ से सम्मानित किया गया। इसके बाद काव्यपाठ, कजरी, सोहर, लोकगीत तथा अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर तक मंत्रमुग्ध रखा। समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को समानता, संवेदना और मानवीय मूल्यों का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने और सामाजिक चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अंत में आयोजकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी साहित्यकारों, कलाकारों, प्रशासनिक अधिकारियों, पत्रकारों, स्वयंसेवकों और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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