लोकगायिका सुचिता गुप्ता की कज़री गायन पर छात्राएं झूम उठी

वाराणसी।वसंत कन्या महा विद्यालय में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से संबद्ध एवं NAAC मान्यता प्राप्त वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा, वाराणसी के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ ‘IQAC’ के तत्वावधान में संगीत (गायन) विभाग एवं संगीत (वादन) विभाग द्वारा संगीत संवर्धन हेतु समर्पित संस्था ‘सप्तक’ के सहयोग से “कजरी महोत्सव” का गरिमामय आयोजन महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में किया गया।कार्यक्रम का शुभारम्भ मां वसंत, डॉ एनी बेसेंट के समक्ष पुष्पार्चन के साथ हुआ।

संगीत गायन विभाग की छात्राओं ने विभागाध्यक्ष प्रो0 सीमा वर्मा के निर्देशन में महाविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया। प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भारतीय लोकसंगीत हमारी सांस्कृतिक पहचान का आधार है। कजरी जैसी लोकविधाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि लोकजीवन की संवेदनाओं, प्रकृति प्रेम, सामाजिक संबंधों और सांस्कृतिक मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति हैं।

उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में भारतीय सांस्कृतिक परम्पराओं के प्रति सम्मान एवं संवेदनशीलता विकसित करने के लिए निरंतर ऐसे आयोजनों होते रहे है। इसी क्रम में कजरी महोत्सव का आयोजन नये सत्र के साथ वर्षा-ऋतु के आगमन का आवश्यक पर्व है।

महाविद्यालय की प्रबंधिका श्रीमती उमा भट्टाचार्या ने अपने संदेश में आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय लोककलाओं का संरक्षण समय की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे आधुनिकता के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ें रहें तथा लोकसंगीत और लोक संस्कृति के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

कार्यक्रम की सूत्रधार, संगीत गायन विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो सीमा वर्मा ने कजरी को पूर्वांचल की सांस्कृतिक चेतना और लोकजीवन की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि लोकसंगीत हमारी परम्पराओं, सामाजिक मूल्यों तथा सांस्कृतिक अस्मिता का जीवंत स्वर है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को भारतीय लोक संस्कृति से जोड़़ने तथा लोककलाओं के संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

कार्यक्रम में प्रख्यात शास्त्रीय एवं लोकगायिका विदुषी सुचरिता गुप्ता और उनकी संस्था ‘सप्तक’ ने मुख्य प्रस्तुति दी।

उन्होंने सावन ऋतु की भावभूमि पर आधारित पारंपरिक कजरियों, ढुलमुनिया कजरी, शास्त्रीय कजरी, झूला इत्यादि की मनोहारी प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुमधुर गायकी, भावपूर्ण अभिव्यक्ति तथा शास्त्रीयता और लोकधुनो के सुंदर समन्वय ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। प्रत्येक प्रस्तुति पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

संगीत (गायन) विभाग की छात्राओं ने भी विविध कजरी गीतों की प्रभावशाली प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। वाद्य-संगीत की आकर्षक संगत ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों ने लोकसंगीत की समृद्ध परम्परा, बनारस की सांस्कृतिक विरासत तथा भारतीय संगीत की लोकधारा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

नृत्य प्रस्तुतियों में, संस्कृत विभाग की कु प्रतिष्ठा तथा इतिहास विभाग कु आली प्रकाश ने क्रमशः कालिदास के महाकाव्य ‘मेघदूतम्’ तथा पण्डित बिरजू महाराज की संगीत रचना पर प्रभावशाली नृत्य प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का सफल संयोजन IQAC की ओर से प्रभावी ढंग से किया गया तथा अंत में सभी अतिथियों, कलाकारों, सहयोगी संस्था ‘सप्तक’, प्राध्यापकों, छात्राओं एवं उपस्थित श्रोताओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया। इस अवसर पर संगीत गायन एवं वादन विभाग के साथ महाविद्यालय के सभी शिक्षक/शिक्षिकाओं की उपस्थिति रही।

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