
राजदूत विशाल वी. शर्मा ने उत्तर प्रदेश सरकार व एएसआई अधिकारियों के साथ बैठक की
वाराणसी। भारत सरकार में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने विश्व धरोहर स्थल सारनाथ का भ्रमण किया। उनके साथ श्री विशाल वी. शर्मा, राजदूत / स्थायी प्रतिनिधि, भारत, यूनेस्को भी उपस्थित रहे। राजदूत शर्मा ने सारनाथ में उत्तर प्रदेश सरकार तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों के साथ बैठक की।
बैठक में सत्येंद्र कुमार, जिलाधिकारी, वाराणसी; पूर्ण बोरा, उपाध्यक्ष, वाराणसी विकास प्राधिकरण; हिमांशु नागपाल, नगर आयुक्त; श्रीमती निधि चौहान, प्रभागीय वन अधिकारी; डॉ. अरुण राज टी., क्षेत्रीय निदेशक, एएसआई नितिन सिंह, एसडीएम (सदर); डॉ. बीरी सिंह, अधीक्षण पुरातत्वविद्, सारनाथ सर्किल, एएसआई दिनेश कुमार, संयुक्त निदेशक (पर्यटन), उत्तर प्रदेश सरकार; तथा अन्य अधिकारियों ने भाग लिया।
*प्रतीकात्मक एवं रणनीतिक महत्व की यात्रा*
राजदूत शर्मा, जो सारनाथ के प्रतिष्ठित यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में सूचीकरण के पश्चात बुसान, दक्षिण कोरिया से सीधे सारनाथ पहुँचे थे, अब वापस पेरिस, फ्रांस स्थित यूनेस्को मुख्यालय के लिए प्रस्थान करेंगे। अपनी राजनयिक तैनाती की ओर लौटते समय सारनाथ में उनकी उपस्थिति यह दर्शाती है कि भारत सरकार इस ऐतिहासिक सूचीकरण को कितनी गंभीरता से ले रही है – यह संपूर्ण राष्ट्र के लिए गर्व का क्षण है।
सारनाथ का महत्व स्वयं गौतम बुद्ध से भी पूर्व का है, यह 2,500 वर्षों से अधिक समय से पूजा, शिक्षा और दर्शन का स्थल रहा है। इतिहास में इस स्थल को कई नामों से जाना गया है – भगवान शिव के नाम पर सारंगनाथ; ऋषिपत्तन, अर्थात वह स्थान जहाँ ऋषियों के अवतरण की मान्यता है; पालि भाषा में इसिपत्तन; तथा मृगदाव अर्थात हिरण वन (डियर पार्क)।
बुसान में सूचीकरण के पश्चात अपने संबोधन में, राजदूत शर्मा ने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, तथा उत्तर प्रदेश सरकार को इस मान्यता को प्राप्त करने में उनके सहयोग हेतु धन्यवाद दिया था। सारनाथ उत्तर प्रदेश की चौथी तथा भारत की 45वीं विश्व धरोहर संपत्ति है। यह राजदूत शर्मा की सारनाथ की पहली यात्रा थी; उल्लेखनीय है कि उनके नाना का पैतृक गाँव समीपवर्ती पिंडरा में स्थित है।
*विश्व धरोहर संधि के दिशा-निर्देशों के पालन पर बल*
बैठक के दौरान, राजदूत शर्मा ने स्थल के प्रबंधन एवं संरक्षण में यूनेस्को की विश्व धरोहर संधि के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने के महत्व पर बल दिया। गौरतलब है कि यूनेस्को – संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन – की स्थापना 1945 में हुई थी, और भारत इसका एक संस्थापक सदस्य है। हिंदी 1948 से यूनेस्को की महासभा (जनरल कॉन्फ्रेंस) की आधिकारिक भाषाओं में से एक रही है।







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