
वाराणसी।सांस्कृतिक संस्था नादश्री की ओर से कबीरचौरा में तीन दिवसीय सांगीतिक कार्यशाला को प्रस्तुतीकरण के साथ विराम दिया गया।
इस कार्यशाला में पूरब अंग की गायिकी के विभिन्न आयामों से परिचित कराया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात तबला वादक पंडित पूरन महाराज ने अपने प्रेरक उद्बोधन में भारतीय शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा, गुरु – शिष्य परंपरा तथा संगीत साधना के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने विद्यार्थियों के निरंतर रियाज, अनुशासन एवं भारतीय संस्कृति मूल्यों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला की विशेषज्ञ नादश्री संस्था की अध्यक्ष और शास्त्रीय गायक मीना मिश्रा ने पूरब अंग को विभिन्न शैलियों ठुमरी, दादरा, चैती, कजरी एवं होरी की गायिकी के बारे में प्रयोगिक जानकारी दी। भावभिव्यक्ति तथा व्यवहारिक पक्षों का विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया।प्रतिभागियों ने उनके मार्गदर्शन में विभिन्न रचनाओं का अभ्यास कर अपनी प्रस्तुति कौशल को विकसित किया। इस अवसर पर 40से अधिक छात्र छात्राओं तथा संगीत प्रेमी उपस्थित रहे। अंत में धन्यवाद ज्ञापन देव नारायण मिश्र ने किया।










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